आजीवन अविवाहित रहने वाले अटल जी को भी कॉलेज-लाइफ में हुआ था प्यार

जिंदगी के हर मोर्चे पर संघर्ष को मात देकर जिंदगी के 94 बसंत देख चुके भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी आज जिंदगी को अलविदा कह गये । सवा सौ करोड़ देशवासियों की दुआओं और 'हार न माननें' की अटल जी की छवि हीं है जिसके बदौलत आज हर कोई उनके स्वस्थ होनें का कामना कर रहा था । अटल जी से जुड़े कई संस्मरण है जिसे आज सम्पूर्ण देश याद कर रहा है ।

एक बार की बात है जब एक पत्रकार नें उनसे पूछ दिया 'सर, आप अभीतक कुंवारे क्यों हैं? '. अपनें वाक्-पटुता के लिए फेमस वाजपेयी जी नें जवाब दिया 'मैं अविवाहित हूँ, कुंवारा नहीं हूँ'. दरअसल वाजपेयी जी नें आजीवन शादी नहीं की. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस महान शख्सियत को भी किसी से प्यार हुआ था ।

अटल युग का अंत: नही रहा राजनीति का शिखर पुरुष

भले हीं उनका प्यार शादी के मंजिल तक नहीं पहुँच सका लेकिन वे एक आदर्श प्रेमी जरूर थे. सरकार के एक कश्मीरी अधिकारी की शर्मीली बेटी लेकिन मीठी उर्दू जुबान की धनी राजकुमारी कौल अटल जी के लिए आजीवन सबकुछ रहीं । वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर नें इसे राजनीतिक हलकों की सबसे मशहूर प्रेम कहानी कहा है ।

दरअसल बात 1940 से पहले की है जब कौल और अटल ग्वालियर के एक कॉलेज में पढ़ा करते थें. यह वह समय था जब लड़के-लड़कियों के बातचीत करनें को गलत नजरिए से देखा जाता था । अटल जी नें कौल के लिए लाइब्रेरी की एक किताब में 'लव लेटर' लिख कर रख दिया, जो राजकुमारी कौल को प्राप्त भी हुई लेकिन कौल का जवाब अटल जी तक नहीं पहुँच सका और उनके पिता नें राजकुमारी की शादी एक युवा कॉलेज टीचर बृज नारायण कौल से कर दी ।

पारिवार के करीबी लोग बताते थे कि राजकुमारी अटल जी से शादी करना चाहती थी लेकिन उनके परिवार वाले इस बात के लिए तैयार नहीं थे । यूं तो थे तो दोनों ब्राह्मण लेकिन राजकुमारी का परिवार अपनें को उच्च कुल का ब्राह्मण मानता था जिस कारण अटल जी ने अविवाहित रहनें का फैसला किया. लेकिन राजकुमारी कौल और उनके दिल्ली के रामजस कॉलेज में फिलॉस्फी के प्रोफेसर पति दोनों नें अटल जी के साथ रहनें का फैसला किया ।

इन दोनों के दोस्ती को लेकर न कभी सवाल उछाले गए और ना हीं दोनों नें कभी रिश्ते को खोलनें की जरूरत समझी. जब वे 1977 की देसाई सरकार में विदेश मंत्री बनकर सरकारी आवास में गए तो कौल दंपती भी उनके साथ थे. राजकुमारी,अटल जी के लिए कितनी खास थी इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता था । अटल जी का खाना उन्ही से पूछकर बनता था ।

2014 में राजकुमारी कौल के निधन के बाद देश के प्रमुख समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस नें उनके रिश्ते को विस्तार से बताया था. हालांकि अटल जी उस समय अल्जाइमर के शिकार हो गए थे. कौल को सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी 'माताजी' कहकर बुलाते थे. उनके अंतिम संस्कार में आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली से लेकर कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया भी गए थे ।

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ राजकुमारी कौल के रिश्ते को लेकर संघ में नाराजगी भी रही. लेकिन एक 'अविवाहित' राजनेता और विवाहित दोस्त की इस अमर प्रेम कहानी को कोई नहीं तोड़ सका ऐसे हैं हमारे देश के 'अभिभावक' राजनीति के अजातशत्रु श्रद्धेय वाजपेयी जी. आज सभी भारतीय धर्म, जाति, भाषा और पार्टी के बंधन से मुक्त होकर इस युगपुरूष को श्रधांजली अर्पित कर रहे हैं ।

आज की जरूरतों के हिसाब से अटल जी कुछ पंक्तियों के साथ समापन कर रहे हैं 

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

Facebook Comments

Ankush M Thakur

Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator

Leave a Reply