नहीं भा रही ‘ड्रैगन’ को भारत की मीडिया, ताइवान से लगातार ख़राब हो रहे रिश्ते

महाशक्ति बनने की ललक में चीन ने दुनिया के लगभग हर शक्तिशाली देश से बैर मोल ले ली है। इसी कतार में आज़ाद देश ताइवान भी शामिल हो चुका है जो कभी चीन का हिस्सा हुआ करता था।

चीन को यह भी रास नहीं आ रहा, महाशक्ति बनने का भूखा चीन कोरोना काल में अपनी विस्‍तारवादी नीति के कारण अपने पड़ोसियों से रिश्‍ते काफी खराब हो चुका हैं और वह हांगकांग में राष्‍ट्रीय कानून पास करने के बाद वह ताइवान और भारत की सीमाओं पर सैन्‍यबल बढ़ाने में लगा हुआ है। हालांकि दोनों ही देशों से चीन को करारा जवाब मिल रहा है। ताइवान ताइवान तटरक्षक बल ने अवैध रूप से अपनी समुंद्री सीमा में खनन करने वाले चीनी रेत ड्रेजर को रोक दिया है।

आपको बताते चले ताइवान न्‍यूज की रिपोर्ट के अनुसार, चीन अवैध रूप से उसकी समुंद्री सीमा के अंदर आकर रेत खनन करने में लगा हुआ था, जिसको ताइवान के तटरक्षक बल ने रोक दिया। बताया जा रहा है कि चीन जिस जहाज में यह खनन कर रहा था, वह ताइवान के किसी भी जहाज से 7,539 टन बड़ा था।

चीन लगातार ताइवान की सीमा में अवैध रूप से मछली पकड़ना और रेत खनन का काम कर रहा है, जिसको लेकर दोनों ही देशों के बीच लंबे समय से टकराव हो रहा है।

ताजा घटना यूएनडीएन के पेन्घू काउंटी के दर्शनीय द्वीप क्यूमेई के 46 समुद्री मील दक्षिण-पश्चिम में घटी। सुबह तड़के इस क्षेत्र में अनुमानित 20 चीनी जहाज दिखाई दिए, लेकिन तटरक्षक बल ने अपनी उपस्थिति 24 घंटे बढ़ा दी, जिसमें सेना की हवाई इकाई को भी शामिल किया गया। उसी समय, ताइवान ने भी चीन से संपर्क किया और ताइवान समुंद्री सीमा में अवैध ड्रेजिंग जहाजों को वापस ले जाने को कहा।

ताइवान के तटरक्षक ने कहा कि सबसे बड़े चीनी पोत में 10 लोगों का एक चालक दल था और इसमें करीब 400 टन रेत भरा हुआ था। इसके बाद चार जहाजों ने चीनी पोत को घेर लिया और उसको निरीक्षण के लिए काऊशुंग शहर के एक बंदरगाह पर ले गए। रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की तरफ से इस जहाज को साफ कह दिया गया है कि उसे रेत को समुद्र में वापस फेंकना होगा।

चीन की तकलीफों का लतीफा यही खत्म नहीं होता चीन न ही भारत और ताइवान के सुगम रिश्ते भी कुछ खास नहीं भा रहें । पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध के बीच चीन ताइवान को लेकर भारतीय मीडिया के कवरेज से बौखला गया है। चीन का कहना है कि भारतीय मीडिया चीन की आलोचना करने को हमेशा मौके तलाशने की फिराक में रहता है। दरअसल, 19 मई को भारतीय मीडिया में प्रकाशित एक खबर में ताइवान के विश्व स्वास्थ्य सभा में शामिल होने की मांग को लेकर भारत के समर्थन को जरूरी बताया गया था।

चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि दो बड़ी एशियाई महाशक्तियों के बीच गलतफहमी पैदा करने में भारतीय मीडिया ने बड़ी भूमिका निभाई है। ऐसा तब हो रहा है जब पश्चिमी शक्तियां यही चाहती है कि भारत और चीन के बीच कटुता बढ़े। लेख में कहा गया है कि भारतीय मीडिया चीन पर कड़ी नजर रखता है।

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