icc should change this law after world cup
क्रिकेट

आईसीसी को बदलने पड़ेंगे ये नियम, दुनियाभर में हो रही है किरकिरी

विश्वकप 2019 को जीतने के लिए लगभग डेढ़ महीने तक दुनिया की 10 सर्वश्रेष्ठ टीमें एक दूसरे के आमने सामने थी। 14 जुलाई को फाइनल के साथ क्रिकेट के महाकुंभ का समापन हो गया। लेकिन इस कुंभ में हर जगह खलल डाला क्रिकेट को चलानेवाली संस्था आईसीसी के नियमों नें। आईसीसी ने विलेन का रोल निभाया तो बारिश नें रही सही कसर पूरी कर दी। कभी कभी किसी एक टीम को बहुत ज्यादा फायदा हो गया तो कभी दोनो टीमों को बराबर का नुक़सान। फाइनल में जिन परिस्थितियों में न्यूजीलैंड की टीम हारी, किसी को भी अच्छा नहीं लगा। यहाँ या तो ट्रॉफी शेयर किया जाना चाहिए था या फिर कोई और तरीका। इस विश्वकप के बाद आईसीसी को कुछ अहम फैसले लेने की जरूरत है।

1. मैदानी अंपायर से होनेवाली गलती को थर्ड अंपायर तुरंत सही करे

जिस तरह इस विश्वकप में निचले स्तर की अंपायरिंग हुई है, आईसीसी को बिना देर किए इसे लागू करने की जरूरत है। वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के मैच में क्रिस गेल, मिचेल स्टार्क के जिस गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हुए उससे पिछली गेंद वह बड़ी नोबॉल थी लेकिन अंपायर क्रिस गैफेनी ने ध्यान हीं नहीं दिया। अगर यह नोबॉल होती तो गेल जिस बॉल पर आउट हुए,वह फ्री हिट होती। सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत के हार में भी अंपायरिंग का योगदान रहा। न्यूजीलैंड के 6 प्लेयर 30 गज की रेखा से बाहर थे जबकि नियम पाँच फील्डरों का है।

आईसीसी को अपने अंपायरों को नियमों की उच्च ट्रेनिंग देने की जरूरत भी है। फाइनल में न्यूजीलैंड को इसका परिणाम भुगतना पड़ा। आईसीसी एलीट पैनल के बेहतरीन अंपायर रहे साइमन टफेल नें बताया कि अंपायरों नें फाइनल में गलती की। 50वें ओवर की चौथी बॉल पर गुप्टिल का थ्रो स्टोक्स के बैट से लगकर बाउंड्री पार कर गया। अंपायरों नें इंग्लैंड को 6 रन दिए जिसमें दो रन दौड़कर पूरा करने का भी था। लेकिन चूँकि जब गुप्टिल के हाथ से थ्रो निकली,तब दोनो बल्लेबाज दूसरे रन के लिए एक दूसरे को क्रॉस नहीं कर पाए थे। ऐसे में 5 रन हीं मिलना था। अगर ऐसा होता तो न्यूजीलैंड एक रन से जीत जाती।

2. सुपर ओवर में मैच टाई होने पर बाउंड्री की गिनती कर नतीजा देने का नियम

विश्वकप फाइनल में न्यूजीलैंड नें पहले बैटिंग कर 241 रन बनाए। इंग्लैंड भी 50 ओवर में 241 रन बना सकी। सुपर ओवर में दोनों टीमों नें 15-15 रन बनाए और फिर टाई खेला। लेकिन चूंकि इंग्लैंड नें न्यूजीलैंड से 6 बाउंड्री ज्यादा मारी इसलिए न्यूजीलैंड बराबर की क्रिकेट खेलने के बावजूद हार गया। इस नियम को सबसे पहले हटाने की जरूरत है। हालांकि बार बार ऐसा नहीं होता लेकिन आईसीसी इस नियम के साथ डिजर्विंग टीम के साथ अन्याय नहीं कर सकती।

3. टीम को एक पारी में दो डीआरएस दिया जाए

किसी टीम नें अगर पहले कुछ ओवर में एक रिव्यू इस्तेमाल कर लिया तो उसके बाद दूसरा मिलता हीं नहीं। ऐसे में अंपायर के गलत डिसीजन उस टीम के लिए मुसीबत बन जाते है। जेसन रॉय सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गलत आउट दिए गए। लेकिन चूंकि बेयरस्टो नें पहले ही इसका इस्तेमाल कर लिया था, इसलिए वह ले नहीं पाए।

4. ओवरथ्रो में बैट्समैन से लगकर गेंद के डिफलेक्शन पर रन देने का नियम

फाइनल में स्टोक्स से बैट से लगकर थ्रो की गई बॉल बाउंड्री पार गई जिससे चार रन मिल गए। उसी ओवरथ्रो के चार अतिरिक्त रनों नें न्यूजीलैंड से जीत छीन लिया। जबकि यहाँ गलती न्यूजीलैंड के किसी खिलाड़ी की नहीं थी। आमतौर पर खेल भावना के अनुसार बल्लेबाज अक्सर ये रन नहीं लेते हैं। लेकिन इंग्लैंड और बेन स्टोक्स नें यहां खेल भावना ताक पर रख दी क्योंकि सामने विश्वकप था।

5. मैदानी अंपायर के डिसीजन में अंपायर्स कॉल का नियम

यहाँ बदलाव की जरूरत है क्योंकि अक्सर किसी टीम को नाजायज फायदा मिलता है। एलबीडब्ल्यू के निर्णय में यह अक़्सर देखा जाता है कि गेंद अगर आधी स्टंप को हिट कर रही हो तो अंपायर का निर्णय हीं अंतिम मान लिया जाता है। ऐसे में अगर बैट्समैन को आउट दिया गया है तो वह आउट हो जाता है। और अगर अंपायर नें नॉटआउट दिया है तो विपक्षी टीम के रिव्यू लेने के बावजूद बैट्समैन नॉटआउट हीं रहता है। अगर गेंद विकेट पर लग रही है तो इसमे अंपायर्स कॉल का क्या मतलब। फाइनल के दू‌सरी पारी की पहली गेंद पर रॉय आउट हो जाते लेकिन अंपायर्स कॉल नें बचा दिया।

6. बारिश के बाद डकवर्थ लुईस का नियम

डकवर्थ लुईस का नियम हमेशा से विलेन बनता आया है। इसमें बराबरी का मैच एकतरफ झुक जाता है जबकि दूसरी टीम की कोई गलती नहीं होती है। ऐसे में इसमें संशोधन की गुंजाइश है।

7. सीजन को ध्यान में रखकर विश्वकप कराया जाए

इस विश्वकप को इंग्लैंड में बारिश के मौसम के दौरान कराया गया इसलिए चार मैचों का रिजल्ट नहीं निकला जबकि तीन के रिजल्ट डकवर्थ लुईस नियम से आए। ऐसे में आईसीसी को ध्यान देने की जरूरत है।

8. विश्वकप में भाग लेनेवाली टीमों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि छोटी टीमों को भी अनुभव मिले

इससे क्रिकेट के विकास में मदद मिलेगी। आयरलैंड, स्कॉटलैंड, जिंबाब्वे और नीदरलैंड जैसी टीमें अच्छी खेलती रही हैं। आईसीसी अगर इन बातों पर ध्यान दे तो निश्चित हीं क्रिकेट को और लोकप्रिय बनाया जा सकेगा।

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Ankush M Thakur
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
http://www.thenationfirst.com

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