जुर्म

बच्चियों से रेप पर सख्त मोदी सरकार, अब 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप पर होगी फांसी

उन्नाव और कठुआ रेप से अभी पूरा देश उबल ही रहा था कि गुजरात के सूरत और मध्य प्रदेश के इंदौर से छोटी-छोटी मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म का मामला फिर सामने आता है .और इसीलिए दिन ब दिन छोटी बच्चियों के साथ बढ़ते रेप और यौन शोषण की घटनाओं को देखते हुए नरेन्द्र मोदी कैबिनेट ने शनिवार को शख्त फैसला लिया है. प्रधानमंत्री के घर पर हुई बैठक में क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. इस अध्यादेश में रेप के मामलों में कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. न्यूनतम 7 साल की सजा को बढ़ाकर 10 साल किया गया है. वहीं 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किया गया है.

क्या है यह अध्यादेश ?

इस अध्यादेश में 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों और 13-16 की उम्र की किशोरियों से बलात्कार के दोषियों के खिलाफ सख्त दंड का नियम बनाया गया है . इसके तहत 12 साल से कम उम्र के बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को अदालतों द्वारा फांसी की सजा देने की बात कही गई है तो वहीं 13-16 साल की बच्चियों के साथ रेप करने पर काम से कम 20 साल की उम्रकैद का प्रावधान किया गया है .

इसके अलावा बलात्कार के मामलों पर तेजी से करवाई और सुनवाई हो इसके लिए भी अनेक उपाय तलाशें गयें हैं . सभी रेप केस में 6 महीने के भीतर फैसला सुनाना ज़रूरी रखा गया है, नए संशोधन के तहत रेप केस की जांच 2 महीने में पूरी करनी होगी इस दौरान आरोपियों अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी. वहीं महिला के साथ बलात्कार के संदर्भ में सजा को 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष का कर दिया गया है जिसे बाद में बढ़ाकर उम्र कैद भी किया जा सकता है.

इसके साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र की किशोरी से रेप के दोषियों को न्यूनतम सजा को 10 वर्ष कारावास से बढ़ाकर 20 वर्ष कारावास किया गया है जिसे बढ़ा कर उम्र कैद किया जा सकता है. 16 वर्ष से कम आयु की किशोरी से सामूहिक बलात्कार के दोषियों की सजा शेष जीवन तक की कैद होगी . बारह साल से कम उम्र के बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को अदालतों द्वारा कम से कम 20 साल कारावास की सजा या मृत्यु दंड होगी.

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