बलिया के इंटर कॉलेज में 'भारत माता की जय' बोलने पर छात्रों को दी जाती है सजा
जुर्म राजनीति

बलिया के इंटर कॉलेज में 'भारत माता की जय' बोलने पर छात्रों को दी जाती है सजा

देश में 'भारत माता की जय' बोलने को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. नया विवाद उत्तर प्रदेश के बलिया से सामने आया है. यहां के एक इंटर कॉलेज में 'भारत माता की जय' बोलने पर छात्रों को सजा दी जाती है. यहां बच्चों को प्रार्थना के बाद भारत माता की जय बोलने पर पाबंदी है, कोई इस फरमान के खिलाफ जाता है तो उसे मुर्गा तक बना दिया जाता है बलिया में एक कॉलेज है जिसका नाम जीएमएएम इंटर कॉलेज है.

इसके पीछे की सच्चाई जानेंगे तो लोकतंत्र और संविधान दोनों का गला घोटने की साजिश साफ दिखाई देगी, इस सरकारी स्कूल में एक खास समुदाय के शिक्षकों का फरमान है, यहां भारत माता की जय बोलना मना है. ना खुद बोलेंगे और ना ही बच्चों को बोलने दिया जाएगा, जिस उम्र में छात्र देश का इतिहास पढ़ रहे होते हैं, जिन क्लासों में छात्रों का स्वतंत्रता की क्रांतिकारी कहानियां पढ़कर गर्व से सीना फूल जाता है, उन्ही क्लासों में छात्रों को सिखाया जा रहा है, भारत माता की जय नहीं बोलना है

कॉलेज के शिक्षक ने ही खोली कॉलेज की पोल

कॉलेज की सच्चाई इसी कॉलेज में पढ़ाने वाले एक शिक्षक संजय पांडे सामने लाए हैं, मालगोदाम रोड पर बने गांधी मोहम्मद अली मेमोरियल इंटर कॉलेज की इन्होंने सच्चाई बताई है, कॉलेज के बाहर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. ये एक ऐसा फरमान है जिसमें बोलने की आज़ादी छीन ली जाती है, देशभक्ति की भावना को दबा दिया जाता है, भारत मां के सीने पर खड़ा होकर उसी के जयकारे का अधिकार छीन लिया जाता है, शिक्षा के मंदिर में धर्म की दीवार खड़ी करने वाले शिक्षकों की कहानी साफ हो गई,

उसी कॉलेज के शिक्षक ने कैमरे के सामने कुबूला की हमारे कॉलेज में भारत माता की जय बोलना मना है, सवाल ये है, जो भारत माता की जय हमारी सभ्यता है, जो हमारा इतिहास है, उसी नारे को बोलने से क्यों रोका गया, कॉलेज छात्रों को कौन सी शिक्षा दे रहा है, जिन शिक्षकों का धर्म ही समानता व एकता का संदेश देना है, वही शिक्षक छात्रों के बीच नफरत की दीवार क्यों खड़ी कर रहे हैं...

अपनी विचारधारा छात्रों को थोपी जा रही है

इस देश की बदकिस्मती ये है कि इसी देश की जमी पर खड़े होकर इसकी शान से बेईमानी हो रही है , जश्न ए आज़ादी वाले दिन महाराजगंज से एक वीडियो सामने आया था, वीडियो एक मदरसे का था और कुछ मौलाना मदरसे में राष्ट्रगान गाने से इनकार कर रहे थे, और अब बलिया से वीडियो सामने आया है. ये वो बलिया है जिसकी ज़मी से जन्में क्रांतिकारियों के जुनून से ही देश को आजादी मिली थी,

हिंदुस्तान तो 1947 को आजाद हुआ लेकिन उसी हिंदुस्तान का जिला बलिया देश की आज़ादी से पांच साल पहले ही आज़ाद हो गया था. बलिया के सैकड़ों वीर क्रांतिकारियों ने अपनी जान की कुर्बानी देकर बलिया को 19 अगस्त 1942 को ही आजाद करा लिया था. यहीं से नारा निकला था, यह अमर शहीदों की बस्ती, इक खेल यहां कुर्बानी है! भारत छोड़ो के नारे की, बलिया इक अमिट निशानी है. जिस धरती पर वीर सपूतों ने जन्म लिया, जिनकी कुर्बानियों के बाद देश को गुलामी छोड़कर खुले में सांस लेने की आजादी मिली, उसी बलिया की धरती पर देश की भविष्य को बरगलाने की कोशिश हो रही है,

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मंगल पांडेय जैसे क्रांतिकारियों की कहानियों की जगह पर छात्रों को भारत मां की जय बोलने से रोका जा रहा है, इस स्कूल की खास बात यही है यहां ज्यादा शिक्षक मुस्लिम हैं, यही कारण है कॉलेज उन्हीं के नियमों के मुताबिक चलाया जाता है, अब वो जो भी नियम बनाते हैं छात्र उसी के हिसाब से चलते जाते हैं. ये वो नारा है जिसे बोलने से क्रांतिकारियों को ताकत मिलती थी, वही नारा सियासत के अखाड़े का सबसे ब़ड़ा हथियार बना, समय-समय पर नारे के नाम पर राजनीति होती रही.

कभी नारे का साजिशन प्रयोग किया गया, तो कभी फतवे लगाए गए, इस नाजुक मसले पर कभी भी सियासत संवेदनशील नहीं हुई. फायदे के लिए नारा भी लगाया गया और भारत माता की जय नहीं बोलेंगे भी चिल्लाया गया. वो सियासत है और सियासत में सब कुछ जायज हो जाता है, लेकिन जब शिक्षा के मंदिर में बैठे कर धर्म के नाम पर बंटवारे की कोशिश हो तो सवाल गंभीर हो जाते हैं. की क्रांतिकारी बलिया की जमीन पर खड़े होकर शिक्षक बच्चों को क्या ज्ञान देना चाहते हैं, सियासत के नज़रिए और उलेमाओं के फतवों से दूर हटकर देखा जाए तो ज्यादातर मुस्लिल इस नारे से एतराज नहीं रखते, लेकिन जब शिक्षक सियासत का पाठ पढ़कर बैठे हों तो उनसे कौन से ज्ञान की उम्मीद की जाएगी,

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