सोनभद्र हत्याकांड | Sonbhadra gun fight
जुर्म

आधे घंटे तक लगातार फायरिंग कर गिरा दी 10 लाशें, सोनभद्र हत्याकांड की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला आजकल मीडिया की सुर्खियों में है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. कारण है 17 जुलाई को वहां हुआ नरसंहार, जिसमें 10 लोगों की जान चली गयी. इस नरसंहार की वजह थी वहां की 90 बीघा विवादित जमीन.

दरअसल, सोनभद्र जिले के उम्भा गाँव में गोंड और गुर्जर समाज के लोग रहते हैं. गोंड आदिवासी समाज से आते है. इनके घरों के बीच करीब 4 km की दुरी है. लेकिन, इस दायरे 90 बीघा जमीन भी आती है जिसके चलते काफी लंबे समय से विवाद चल रहा है.

17 जुलाई बुधवार के दिन गुर्जर समाज से ताल्लुक रखने वाले ग्राम प्रधान यज्ञदत्त भूरिया इसी विवादित जमीन पर अपने 100-200 लोगों के साथ पहुँचता है और जमीन की जोताई चालू कर देता है. जमीन को जोतते देख गोंड समाज के लोग उसका विरोध करते हैं जिसके बाद यज्ञदत्त उनपर अँधाधुन गोलियां चलवा देता है. इस फायरिंग से गोंड समाज के 10 लोगों की मौत हो गयी और कुछ लोग बुरी तरह से घायल भी हो गये.

पुलिस इस मामले में अब तक 26 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें यज्ञदत्त भी शामिल है. यज्ञदत्त के परिवार से कुल 6 मुख्य आरोपी बनाये गये हैं जिसमें यज्ञदत्त का भाई और भतीजा शामिल है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पीरित परिवार के एक चश्मदीद ने बताया कि यज्ञदत्त ने जमीन पर कब्जे के लिए दूसरी बार हमला करवाया है. यज्ञदत्त ने यह जमीन 2 साल पहले सोसाइटी से खरीदी थी.

शूटआउट के चश्मदीद बताते हैं " बुधवार सुबह जब हम खेतों में काम कर रहे थे तभी 20-25 ट्रेक्टर पर सवार करीब 100 से 200 लोग गाँव में घुस आये उनके पास हथियार भी थे. ये जानकारी मिलते ही सभी लोग खेतों की तरफ भागे, ग्राम प्रधान और उसके साथी जब खेतों में पहुंचे तब गोंड समाज की महिलाये धरने पर बैठ गयी. हमने प्रधान से कहा की वो अदालत के फैसले का इंतजार करे या बैठ कर मसले पर बात करें, इस घटना में घायल बसंतलाल बताते हैं की " प्रधान ने हमारी बात नहीं सुनी और ट्रेक्टर से खेतों को जोतना शुरू कर दिया. हमने उन्हें रोकने की कोशिश की तो प्रधान के लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी.

गाँव के लोग कहते हैं यह जमीन का विवाद 2 सालों से चल रहा है. यह एक सोसाइटी की जमीन है जिस पर हम दशकों से खेती कर रहे हैं. जमीन बिकने की जब हमे खबर हुई तो आशचर्य हुआ की ये जमीन कैसे बिक सकती है! हमने अदालत में इस डील को चुनौती भी दी.

वहीं, सोनभद्र के जिला मजिस्ट्रेट अंकित कुमार अग्रवाल ने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा की " जमीन पहले आदर्श कृषि सहकारी समिति के नाम पर रजिस्टर्ड थी. इस समिति ने स्थानीय लोगों को किराये पर खेती की अनुमति दे रखी थी. अंकित ने बताया कि 1990 में जमीन का मालिकाना हक दो लोगों को ट्रान्सफर के दिया गया, जो एक आईएएस अधिकारी की माँ और पत्नी थीं. फिर उन्होंने प्रधान समेत 3 लोगों को यह जमीन बेच दी थी.

सोनभद्र के इस नरसंहार से पूरी उत्तर प्रदेश की राजनीति हिली हुई है. विपक्ष योगी पर लगातार हमलावर है. प्रियंका गाँधी पिरितों से मिलने की जिद्द पर अड़ी हुई है. प्रशासन ने पूरे इलाके में धारा 144 लगा रखी है.

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Praful Shandilya
praful shandilya is a journalist, columnist and founder of "The Nation First"
http://www.thenationfirst.com

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