विवेक तिवारी हत्याकांड
जुर्म विचार

मुस्कुराइये नहीं, चिंता कीजिए क्योंकि आप लखनऊ में हैं, यहां आप पर हमला करने के लिए पुलिस सदैव तत्पर है

यूपी में सत्ता संभालते वक्त सीएम योगी आदित्यनाथ ने संदेश दिया था, कि जिन लोगों को बंदूक की भाषा में विश्वास है उन्हें बंदूक से जवाब दिया जाएगा, उन्होंने यूपी से गुंडों का सफाया करने के लिए पुलिस को खुली छूट दी, जिसका असर ये हुआ यूपी पुलिस ने ताबड़तोड़ एनकाउंटर शुरू कर दिए.

शुरुआत से लेकर अब तक यूपी पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठते रहे, इन्ही सवालों के बीच लखनऊ से ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे देश को हिला दिया, अपराधियों का एनकाउंटर करने वाली पुलिस ने एक निहत्थे आम आदमी की गोली मारकर हत्या कर दी. हत्यारे पुलिसवालों ने दलील दी विवेक तिवारी संदिग्ध लग रहा था.

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हत्याकांड की कहानी में चार किरदार

इस कहानी के चार किरदार हैं, मृतक विवेक तिवारी, विवेक तिवारी की सहयोगी सना, विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना, और हत्यारोपी कांस्टेबल प्रशांत, इन सबके बीच सवालों में है यूपी पुलिस. वो यूपी पुलिस जो आज से नहीं, एनकाउंटर को लेकर सालों से सवालों के घेरे में हैं. सबसे पहली तस्वीर आरोपी सिपाही की है जिसने विवेक को संदिग्ध होने के शक में गोली मार दी, और अब पुलिस की मिलीभगत से खुद को बेगुनाह साबित करने में जुटा है.और इसके साथ आरोपी संदीप है, जो इस हत्याकांड में प्रशांत के साथ था.

हालांकि संदीप कहां है ये पुलिस नहीं बता रही है. दूसरी तस्वीर में वो इंसान है जिसे बेरहम पुलिसवालों ने मार डाला है, ये विवेक तिवारी की तस्वीर हैं... जिसकी अपनी दुनिया थी, अपना परिवार था, बच्चियां थी, पत्नी थी, खुशहाली थी, लेकिन उसे नहीं पता आजाद हिंदुस्तान के लखनऊ शहर में रात में सड़क पर निकलने पर पुलिस गोली मार देती है...तीसरी तस्वीर में सहमी हुई वो लड़की है जिसके सामने उसके सहयोगी को गोली को मार दी गई, सना वही इस हत्याकांड की इकलोती चश्मदीद है...वो मदद के लिए चिल्लाती रही.

लेकिन बेरहम पुलिसवाले मिनटों तक टहलते रहे और आखिरी तस्वीर में वो दर्द है जिसे सुनकर आसमान भी सहम जाए, जमीन भी इन आसुओं पर कांपने लगी है. ये पुलिस की गोली का शिकार हुए विवेक की पत्नी कल्पना है जिसे ज़िंदगी के अगले पड़ाव में सिर्फ अंधेरा नज़र आता है, और बीच में वो तस्वीरें जिनमें उत्तर प्रदेश की पुलिस पर होने वाला विश्वास भी दफन हो रहा है.

हत्यारे पुलिसकर्मी को पुलिस बचाने की कोशिशों में लगे हैं

जब पुलिस हत्यारों का साथ देने के लिए खड़ी हो जाए, जब पुलिस सच को झूठ साबित करने की तैयारी करने लगे तो सवाल खड़ा होता है, परिवार को इंसाफ कौन देगा, क्योंकि जिस पुलिस ने विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी उसी पुलिस से इंसाफ की आस लगाना बेईमानी सा लगता है, लखनऊ पुलिस ने एक बेगुनाह को नहीं मारा है, विवेक तिवारी के साथ आज बहुत कुछ मरा है, छोटे-छोटे बच्चों के सर से पिता का साया ही उठ गया, मासूम-बेटियों के हीरो को उन से छीन लिया गया.

एक पत्नी की खुशीयों को मिटा दिया गया, परिवार की आखों का तारा चला गया, इस मुल्क में पुलिस पर होने वाला विश्वास गया है, परिवार कहां जाएगा, किससे इंसाफ की भीख मांगेगा, सवाल इसलिए है क्योंकि इनकी दुनिया को उजाड़ने वाली पुलिस हत्यारे पुलिसकर्मियों को बचाने की कोशिशों में लग गई है. एक बेगुनाह की मौत के विलाप से सारा हिंदुस्तान थम गया है, परिवार को इंसाफ चाहिए और पुलिस हत्या की इस कहानी को कैसे मोड़ने में लगी है वो समझिए.

जब पुलिस ने विवेक तिवारी को गोली मारी तो गाड़ी में उनकी सहयोगी सना भी मौजूद थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर में सना के बयान को बदल दिया...एफआईआर में कहानी को ऐसे दर्शाया गया है की जैसे अभी सब कुछ साफ नहीं है, लेकिन सच्चाई ये है हत्या की ये कथा साफ साफ कहती है, पुलिसवालों ने बेगुनाह विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या की है और वो भी संदिग्ध होने के शक में.

अब जांच चल रही है, परिवार इंसाफ का इंतिज़ार करेगा, और पुलिस अपने तरीके से जांच करेगी, न्याय और अन्याय की इस जंग में इंसाफ मिलेगा भी या नहीं ये कहा नही जा सकता, क्योंकि जब पुलिस शुरुआत में हत्यारों को बचाने के लिए खेल करने लगे तो सोचिए अंत तक जाते जाते कितना कुछ बदला सकता है.

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