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जब इस शख्स के लिए साधना ने कर लिया था अपने आप को कमरे में बंद

हिन्दी  सिनेमा ने कई ऐसे अदाकारा दियें जिसने ना केवल सिर्फ अपनी कलाओं से बल्कि अपनी अदाओं से भी  दर्शकों को खुब लुभाया और अपने अदा से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहीं, लेकिन 60 के दशक में  एक ऐसी अदाकारा थीं जिनकी गिरी हुई झुमका भी फैशन बन जाता था और वो जैसा भी ड्रेस पहनती ,वो भारत मे फैशन ट्रेड बन जाता था । जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ उस समय के फेमस अदाकारा साधना की, जिसने अपने अदा से कई मशहूर अदाकाराओं की छुट्टी कर दी थी ।

एक वक्त था जब साधान हेअर कट फेमस हुआ था । उस समय शायद ही कोई युवती इस हेअर स्टाईल से परिचित न हो । ये हेअर स्टाईल साधना को उनके पत्ति ओ पी नैय्यर साहब ने दिया था । आपको बतादें की जिस साधना कट को  उस दौर में युवतीयों ने पागलों की तरह अपनाया था दरअसल वो  हॉलीवुड की मशहूर अदाकारा ऑड्रे हेपबर्न के हेअर स्टाईल की नकल कि गयी थी । लेकिन साधना अपनी अदाओ  से लोगों को इस कदर दीवाना बना दिया था की नक़ल की गईं हेयर स्टाइल भी उनके नाम यानी साधना कट के नाम से फ़ेमस हुआ

बात फिल्मो की

साधना शुरूआती दौर में सिंधी सिनेमा में काम करती थी उसके बाद उन्हें पहली बार 1960 में फ़िल्म लव इन शिमला में जॉय मुखर्जी के साथ काम किया जिसके डायरेक्टर नैय्यर साहब थे । और 1966 में साधना ने अपने जीवन मे नय्यर साहब से शादी कर एक नया रंग भरा । जब साधना हिंदी सिनेमा में कदम रखी तो उस वक्त उनके पास काफी समय था जिससे वो  बॉलीवुड में खाली पड़ी स्पेस को भर सकें क्योंकि उस समय वैजन्तीमाला, मधुबाला और नरगिस जैसी मशहूर अदाकाराओं का स्थान धीरे धीरे बॉलीवुड से खाली हो रही थी ।

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साधना को पहली बार सस्पेंस थ्रिलर फिल्म 1964 में मिला था जिसका नाम था  ‘वो कौन थी’ । इस फ़िल्म के लिए साधना को बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया । उसके बाद राज खोसला साहब ने साधना के प्रतिभा देखते हुए 1966 में फ़िल्म मेरा साया और 1967 में फ़िल्म अनिता मे लीड रोल दिया । फ़िल्म साया  बॉक्स ऑफिस पर सबसे बड़ी हिट थी । फ़िल्म साया में एक गाना था’ झुमका गिरा रे’ जो आज तक लोगों के ज़ुबान पर चढ़ा हुआ है ।

बीमारी के बाद भी हीट रही साधना की वापसी

लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें थाइराइड हो गया जिसका इलाज उन्होंने अमेरिका में जा कर कराया और वहां से लौटने के बाद बॉलीवुड में जबरदस्त वापसी आप आये बाहर आई से कीं । और उसके बाद गीता मेरा नाम, एक फुल दो माली और इंतकाम जैसी  हिट फिल्म उन्होंने दिया । मेरा नाम गीता उनके पत्ती नय्यर साहब ने ही निर्देशित की थी और उसके बाद साधना ने फिल्मी दुनिया से सन्यास ले लिया । 1995 में नय्यर साहब के ईंतकाल के बाद साधना को  गहरा सदमा लगा जिसका परिणाम हुआ कि वो खुद को एक कमरे में ही बन्द रखने लगीं और अगर कोई मिलने भी जाता तो उनके मुख से एक ही शब्द निकलता मुझे अकेला छोड़ दो ।

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