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अपनी फिल्म 'मगरूरियत' के जरिये जमींदारी प्रथा और जातिवाद जैसी सामाजिक कुरीतियों पर हल्ला बोलने की तैयारी में अनुज

भारत में किसान देश की आत्मा कहे जाते हैं क्योंकि ये किसान हीं है जो इस देश का ख्याल रखते हैं खुद आधे पेट खाकर कर्जों के बोझ तले दब कर भी ये खेती कर अनाज पैदा करते हैं और सम्पूर्ण देशवासियों का पेट भरते हैं । लेकिन आज से करीब 60-70 साल पहले इन किसानों का खून चूसने वाली जमींदारी प्रथा इस भारतीय समाज में मौजूद थी जिस कारण ये आत्मा अपने द्वारा ही उपजाये गये अनाज के लिए तील-तील कर मरते थे और जेब गरम होती थी जमींदारों की.

लेकिन आज उन जमींदारों का  वक़्त बदल गया है और इस प्रथा का अंत हो चुका है अगर आप ये सोचते हैं तो आप गलत हैं क्योंकि मनुष्य अपने अच्छे वक्त को हमेशा संजोकर रखना चाहता है या यूं कहें कि उस पल को वो हमेशा जीना चाहता है चाहे वो वक्त क्यों न दूसरों के लिए जानलेवा हो फिर भी वो उसे ही जीना चाहता है और उसकी महक कहीं न कहीं खुद मे हमेशा जिंदा रखने की कोशिश करता क्योंकि वो वक्त उसके लिए काफी अहम होता है ।

भारत मे ऐसी हीं प्रथा थी जमिंदारी, जो जमिंदार होता था उसके लिए वो वक्त सुनहला होता था लेकिन सामने वाले के लिए जान लेवा । आज भी कुछ ऐसे लोग इस समाज में मौजूद हैं जो कभी जमींदार हुआ करते थे जिनकी जमींदारी तो वक़्त के साथ चली गयी लेकिन जो रह गयी वो उनकीं शानों-शौकत.. उनकी अक्कड़ ।

और अब इसी मुद्दे पर एक हिंदी फीचर फ़िल्म 'मगरूरियत' बनाई जा रही है. जिसमे जमींदारी प्रथा ,ऊँच-नीच, जातिवाद और बंधुआ मजदूरी जैसी सामाजिक कुरीतियों पर जमकर चोट की गयी है . जिसकी शूटिंग अरुनुज फिल्म्स के बैनर तले भागलपुर में की गई है इसके निर्माता एवं निर्देशक बिहार के भागलपुर जिले के ही एक छोटे से गांव बरारी के रहने वाले अनुज कुमार रॉय हैं । और इस फ़िल्म को अपने कलम की धार से शीतांशु अरुण ने सजाया है ।

शूटिंग के दौरान एक सीन समझाते निर्देशक अनुज रॉय

फ़िल्म में मुख्य कलाकार के रूप में बिहार के कुंदन कुमार, हरियाणा के आबिद खान और राधिका गौतम नज़र आएंगी  ।  वहीं सहयोगी कलाकार के रुप में ह्रदया वाजपेयी, अंकुश, आरव, राजेश सागर, शितांशु अरुण, आरोमा, रश्मि, सानू, निधि श्री एंव इस फिल्म के सहायक निर्देशक सुरभी भारती, स्विटी विश्वास हैं । इस फिल्म को विभिन्न फिल्म फेस्टिवल्स में भेजा जायेगा और उसके बाद संभवतः जुलाई-अगस्त में सभी डिजिटल प्लेटफार्म पर रिलीज की जाएगी ।

फिल्म ‘मगरूरियत’ की कास्ट और क्रू

आपको बता दें कि इससे पहले अनुज कुमार रॉय ने एक शार्ट फ़िल्म ‘खामोशी द साइलेंट वर्ड’ बनाया था जिसे दरभंगा इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में बेस्ट शार्ट फ़िल्म मेकर और इनके इस फ़िल्म को बेस्ट शार्ट फ़िल्म के अवॉर्ड से नवाजा गया था । तो वहीं इनकी दूसरी शार्ट फ़िल्म ‘आत्मग्लानि’ को बरलिन फ़्लैश फ़िल्म फेस्टिवल, कारगिल इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल और पटना शार्ट फ़िल्म फेस्टिवल के लिए मुख्य रूप से चुना गया था । अनुज कुमार रॉय खुद एक एक्टिंग स्कूल के डाईरेक्टर भी हैं जो दिल्ली में स्थित है ।

तो वहीं  फ़िल्म की मीडिया सपोटर्स की बात करें तो द नेशन फर्स्ट ने अपना अहम योगदान दिया है । फिल्म ‘मगरूरियत’ में द नेशन फर्स्ट मीडिया पार्टनर की भूमिका में है ।

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