नसीरुद्दीन शाह Controversey
मनोरंजन विचार

हिन्दू-मुस्लिम नही एक हिंदुस्तानी बन कर सोचियेगा, जो नसीरुद्दीन शाह ने कहा क्या वो सच नही है ?

नसीरुद्दीन शाह, हिंदुस्तान के एक उम्दा अभिनेता जो अभिनय के अलावा भी अपनी एक अलग पहचान रखते हैं. जो जाने जाते हैं विभिन्न मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए. हाल ही में जब शाह को मैदान पर भारतीय कप्तान विराट कोहली का वर्ताब अच्छा नही लगा तो उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि " विराट कोहली ना केवल दुनिया के सबसे अच्छे बल्लेबाज हैं बल्कि दुनिया के सबसे बदतमीज खिलाड़ी भी है. उनमें क्रिकेट की जो प्रतिभा है, वो उनकी आक्रामकता और बदतमीजी के आगे फीकी पड़ जाती है. और हाँ, मेरा देश छोड़कर जाने का भी कोई इरादा नही है"

बिलकुल वैसे ही बेबाक ढंग से नसीरुद्दीन शाह ने इस बार भी अपनी राय रखी देश में पनप रहे माहौल को लेकर. और भई क्यों न रखे सबको यहाँ अपनी बातें रखने का अधिकार है , बोलने का अधिकार है . लेकिन इसबार तो बबाल हो गया क्योंकि बात माहौल पर है, कानून वयवस्था पर है , सरकार पर है, अपनी नाकामी पर है और जब अपनी नाकामी पर बात आती है तो अधिकतर हिन्दुस्तानियों में मैं देखता हूँ कि वो क्रिटिसिज्म एक्सेप्ट नही कर पाते हैं और फिर आयं-बायं बोलने लगते है.

ऐसा कई वाक्या हमने देखा है. आमिर खान वाला तो याद ही होगा, 2015 में जब आमिर ने कहा था कि भारत में इतनी असहिष्णुता (असहनशीलता) पिछले कुछ दिनों में बढ़ गई है कि मेरी पत्नी ने एक बार कहा था कि हमे भारत छोड़ देना चाहिए. चलो मान लिया कि आमिर की पत्नी को भारत छोड़ने की बात नही करनी चाहिए थी लेकिन असहनशीलता वाले पॉइंट पे तो लोगों ने गाली-गलोच, जान से मारने की धमकी, पकिस्तान भेजने की धमकी दे कर ये तो साबित कर ही दिया कि लोग कितने सहनशील हैं !

और सबसे बड़ी दिक्कत तो ये है कि कुछ लोग धर्म ,जातिवाद और भक्ति में इतने डूब चुके हैं कि कोई वाजिब प्रशन या मुद्दा भी हो तो उसमें धर्म,जाति और मजहब का एंगल ढूंढने लगते हैं . इन फर्जी राष्ट्रवाद का ढिंढोरा पीटने वालों के मन की बात अगर न कीजिये तो सीधे वो देशद्रोही साबित कर पाकिस्तान भेजवा देंगे.

मै पूछता हूँ कि क्या गलत कहा नसीरुद्दीन शाह ने ? एक बार धर्म, मजहब और भक्ति वाला चश्मा उतार एक हिन्दुस्तानी बनकर सोचियेगा... क्या बीते दिनों एक गाय की मौत को एक इंसान की मौत से अधिक अहमियत नही दी गयी ! गाय के नाम पर किसी के घर में घुसकर उसको मार दिया जाता है, एक पुलिस इंस्पेक्टर को उसी की पुलिस चौकी में घुसकर गोली मार दी जाती है. बताइए यही है कानून वयवस्था... जब एक पुलिस इस्पेक्टर अपनी चौकी में सुरक्षित नही हैं तो हम और आप क्या है ?

क्या पिछले कुछ दिनों या वर्षो से जरुरत से ज्यादा धर्म, जाति और मजहब को तुल नही दिया रहा है! क्या पिछले कुछ दिनों से विकास,रोजगार,शिक्षा जैसे अहम मुद्दों को छोड़कर सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम-मंदिर-मस्जिद की राजनीति नही हो रही है!

तो फिर... सच ही तो कहा है नसीरुद्दीन शाह ने! गलत क्या कहा है ? और हाँ, कई टीवी चैनलों और सोशल मीडिया में देख रहा हूँ, वो चला रहे हैं कि 'नसीरुद्दीन शाह ने कहा- उन्हें देश में डर लगता है' तो इस पर इतना ही कहना चाहूँगा कि ये बढ़ा-चढ़ाकर या फेक न्यूज़ फैलाने वालों से सावधान रहें. बांकी, नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा उसे एक हिन्दू या मुस्लिम बन कर नही एक हिन्दुस्तानी बनकर नीचे पढ़िए और समझने की कोशिश कीजिये-

"ये ज़हर फैल चुका है . इस जिन्न को दोबारा बोतल में बंद करना मुश्किल होगा . खुली छूट मिल गई है क़ानून को अपने हाथों में लेने की . कई इलाक़ों में हमलोग देख रहे हैं कि एक गाय की मौत को ज़्यादा अहमियत दी जाती है एक पुलिस ऑफ़िसर की मौत के बनिस्पत.
मुझे फ़िक्र होती है अपनी औलाद के बारे में सोचकर ,क्योंकि उनका मज़हब ही नहीं है . मज़हबी तालीम मुझे मिली और रत्ना को कम मिली या बिल्कुल भी नहीं मिली क्योंकि एक लिबरल हाउसहोल्ड था उनका .

हमने अपने बच्चों को मज़हबी तालीम बिल्कुल भी नहीं दी. मेरा ये मानना है कि अच्छाई और बुराई का मज़हब से कोई लेना देना नहीं है . अच्छाई और बुराई के बारे में जरूर उनको सिखाया . हमारे जो विलीव्स हैं, दुनिया के बारे में हमने उनको सिखाया. क़ुरान की एक आध आयतें जरूर सिखाई क्योंकि मेरा मानना है कि उसे पढ़कर तलफ्फुज सुधरता है, जैसे हिन्दी का सुधरता है रामायण या महाभारत पढ़कर .

फ़िक्र होती है मुझे अपने बच्चों के बारे में . कल को अगर उन्हें भीड़ ने घेर लिया कि तुम हिन्दू या मुसलमान ? तो उनके पास तो कोई जवाब ही नहीं होगा क्योंकि हालात जल्दी सुधरते मुझे नज़र नहीं आ रहे हैं. इन बातों से मुझे डर नहीं लगता .ग़ुस्सा आता है . मैं चाहता हूँ कि हर राइट थिंकिंग इंसान को ग़ुस्सा आना चाहिए. डर नहीं लगना चाहिए . हमारा घर है . हमें कौन निकाल सकता है यहाँ से".

बातें मत हांकिए अपनी सोंच बदलिए साहब

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