राजीव गाँधी-अटल बिहारी वाजपेयी
इतिहास के पन्नों से

जब अटल जी ने कहा था, आज अगर जिंदा हूँ तो राजीव गांधी की बदौलत

अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे शख्स थे जिन्हें मैं भारतीय राजनीति का युगपुरुष मानता हूँ. ऐसा वक्ति जो सदीयों में एक बार आता है. राजनीति के शिखर तक पहुँचने के बावजूद वाजपेयी में जो शिष्टता और विनम्रता थी वो काबिल-ए-तारीफ है. जहाँ आज के दौर में राजनेता अपने विरोधियों पर मानवीय मर्यादा भूलकर प्रहार करते […]

Sourav Ganguly 2003 world cup final | विश्वकप 2003
इतिहास के पन्नों से खेल

गांगुली की एक गलती और हाथ में आते-आते रह गया 2003 का विश्वकप

साल था 2003 और समय था विश्वकप का, भारतीय टीम का प्रदर्शन उस टूर्नामेंट में काफी शानदार रहा था इसलिए टीम फ़ाइनल तक बड़ी ही आसानी से पहुँच गई थी और फाइनल में भारत के सामने थी ऑस्ट्रेलिया की टीम, जो उस समय विश्व की सबसे धाकड़ टीम हुआ करती थी. रिकी पोंटिंग, एडम गिलक्रिस्ट, […]

satyabhama devi MP | सत्यभामा देवी
इतिहास के पन्नों से राजनीति

बिहार की वो सांसद जिन्होंने गरीबों के लिए दान कर दी थी अपनी 500 बीघा जमीन

सन 1957 में जब बिहार के नवादा को लोकसभा सीट बनाया गया, तब कांग्रेस की सत्यभामा देवी वहां से पहली महिला सांसद बनीं। सत्यभामा देवी ने 1962 में अपना लोकसभा क्षेत्र बदल लिया क्योंकि तब तक नवादा सुरक्षित क्षेत्र बन गया था। इस बार वो जहानाबाद लोकसभा सीट से चुनाव में उतरी और वहां से […]

Mulayam singh yadav and kuldeep nayyar
इतिहास के पन्नों से राजनीति

जब मुलायम सिंह के प्रधानमंत्री बनने के सपने पर पत्रकार कुलदीप नैयर ने पानी फेर दिया था

उत्तर प्रदेश में जब बात राजनीति की हो रही हो और वहां एक मामूली किसान से मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय करने वाले नेता मुलायम सिंह यादव का नाम न आए तो पूरा राजनीति का स्वाद फीका लगने लगता है । मुलायम सिंह अपने रोबीले अंदाज और बाहुबल की ताकत के बदौलत राजनीतिक अखाड़े […]

कैसे हुई भारत में सम्प्रदायवाद की शुरुआत, क्या है इसका इतिहास ? सम्प्रदाय
इतिहास के पन्नों से

कैसे हुई भारत में सम्प्रदायवाद की शुरुआत, क्या है इसका इतिहास ?

“सम्प्रदाय” ये शब्द पढ़ने और सुनने में जितना  सामान्य सा लगता है इसके परिणाम उतने ही भयावह हैं और भारत जैसे देश मे तो इसकी महत्ता अपने चरम पर होती है लेकिन एक वक्त था जब भारत में यह शब्द था ही नही या यूं कहें कि इस शब्द की ज़रूरत ही नही थी । इसका कारण था भारत मे हिन्दू-मुस्लिमों की एकता जो मिसाल के […]

इतिहास के पन्नों से राजनीति

नहीं रहे दिल्ली में बीजेपी की जड़ें जमानें वाले मदनलाल खुराना!

भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार का एक जाना पहचाना चेहरा आज सदा के लिए संसार को अलविदा कह गया. हम बात कर रहे हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे मदनलाल खुराना की. 82 वर्षीय खुराना,  27 अक्टूबर की रात 11:00 बजे सदा के लिए इस दुनिया से रूखसत हो गये. इस बात की जानकारी उनके […]

जयंती विशेष: पंडित नेहरू को भी संसद में खरी खोटी सुनानें वाले राष्ट्रकवि दिनकर जैसा कोई नहीं!
इतिहास के पन्नों से

पंडित नेहरू को भी संसद में खरी खोटी सुनानें वाले राष्ट्रकवि दिनकर जैसा कोई नहीं!

हिंदी भाषा के कवियों की गिनती कम नहीं रही है लेकिन ऐसे भी कवि नहीं हुए जो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की बराबरी कर लें. आजकल के कवि जब एक पक्षीय होकर लेखन कार्य करते हैं, उन्हें इस बात की चिंता सताते रहती है कि हमें अमुक को खुश करना है तो उसको ध्यान में […]

वो 5 महिलाएं जिनके बेहद करीब थे महात्मा गांधी, एक को बताते थे अपनी आध्यत्मिक पत्नी
इतिहास के पन्नों से

वो 5 महिलाएं जिनके बेहद करीब थे महात्मा गांधी, एक को बताते थे अपनी आध्यत्मिक पत्नी

महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्ति थे जो शायद ही कभी अकेले रहे हों । अगर उनकी जीवन काल के उपर लिखी गई पुस्तकों को खंगाला जाये तो ये पता चलता है कि महात्मा गांधी के आसपास हमेशा कुछ लोग ज़रूर रहते थे चाहें वो आम आदमी हो या फिर राजनीति के मोहरे । कहा जाता […]

'कोहिनूर' को पाने के लिए रंजीत सिंह ने इस शासक को उसी के किले में कर लिया था कैद
इतिहास के पन्नों से

'कोहिनूर' को पाने के लिए रंजीत सिंह ने इस शासक को उसी के किले में कर लिया था कैद

इतिहास के पन्नो में अपना खास स्थान रखने वाला इस कोहिनूर हीरे को हर कोई अपने मुकुट या फिर अपने दरबार में रख कर उसकी खूबसूरती को बढ़ाना चाहता था और ऐसा मौका रंजीत सिंह के पास चल कर खुद आया था । अब तक तो उन्होंने केवल इस हीरे का नाम सुना था लेकिन […]

अगर प्लासी का युद्ध सिराजुद्दौला जीत गया होता तो भारत का इतिहास कुछ और होता
इतिहास के पन्नों से

अगर प्लासी का युद्ध सिराजुद्दौला जीत गया होता तो भारत का इतिहास कुछ और होता

कहा जाता है कि अगर प्लासी का युद्ध सिराजुद्दौला जीत गया होता तो यहीं से अंग्रेज वापस चले गये होते इसके साथ ही भारत में उनके विस्तार के रास्ते भी बंद हो जाते और हिन्दुस्तान का इतिहास बदल गया होता लेकिन सिराजूद्दौला का युद्ध जीतना मुश्किल था क्योंकि नवाब (सिराजुद्दौला) उस समय अपने ही घर […]