वो 5 महिलाएं जिनके बेहद करीब थे महात्मा गांधी, एक को बताते थे अपनी आध्यत्मिक पत्नी
इतिहास के पन्नों से

वो 5 महिलाएं जिनके बेहद करीब थे महात्मा गांधी, एक को बताते थे अपनी आध्यत्मिक पत्नी

महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्ति थे जो शायद ही कभी अकेले रहे हों । अगर उनकी जीवन काल के उपर लिखी गई पुस्तकों को खंगाला जाये तो ये पता चलता है कि महात्मा गांधी के आसपास हमेशा कुछ लोग ज़रूर रहते थे चाहें वो आम आदमी हो या फिर राजनीति के मोहरे । कहा जाता है कि महात्मा गांधी अपने आश्रम में कई महिलाओं और पुरुषों के बीच रहा करते थे. वैसे तो वो भारत के हर पुरुष और महिला से प्रेम करते थे लेकिन उनके जीवन में कुछ ऐसी भी महिलाएं थी जो उन से काफी प्रभावित थीं या यूं कहें कि कुछ महिलाएं उनकी सत्य और अहिंसा वाले विचारधारा से सबसे अधिक प्रभावित थी और कहीं न कहीं ये महिलाएं गांधी के रास्तों पर चलने के कारण उनके जीवन मे खास अहमियत रखती थीं

राजकुमारी अमृत

राजकुमारी अमृत कौर

राजकुमारी अमृत कौर वो पहली महिला थीं जो महात्मा गांधी के सबसे करीब थी ।अमृत कौर का जन्म 1889 में हुआ था । उनके पिता का नाम राजा हरनाम सिंह था जो पंजाब के करपुरथल के राजा थे । अमृत कौर और महात्मा गांधी दोनों एक दूसरे से पहली बार 1934 में मिले थे और पहली ही मुलाकात में दोनों एक दूसरे से प्रभावित हो गए जिसके बाद महात्मा गांधी ने राजकुमारी कौर को अपनी आंदोलनों में शामिल करने लगे ।

राजकुमारी कौर ने गांधी का साथ सत्याग्रह और भारत छोड़ो जैसे बड़े आंदोलन में दिया । कहा जाता है कि जब महात्मा गांधी राजकुमारी कौर को खत लिखते थे तो उस खत के शुरुआत में मेरी प्यारी पागल और बागी लिखते थे और खत के अंत मे खुद को तानाशाह बताते थे । राजकुमारी कौर को आजाद भारत की पहला स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था । देश की पहली स्वास्थ मंत्री राजकुमारी कौर की मृत्यु 1964 में हुई थी ।

नीला क्रैम कुक

नीला क्रैम कुक

नीला क्रैम कुक एक विदेशी महिला थी जो गांधी के सत्याग्रही और अहिंसा वाले विचारधारा से प्रभावित हो कर उन्होंने पहली बार गांधी को 1932 में खत लिखा । उस खत में उन्होंने अपने द्वारा छुआछूत को दूर करने के कामों का जिक्र किया था उस समय कुक बेंगलुरु में रहती थी । जब गांधी जी ने कुक का खत पढ़ा तो वो उनसे प्रभावित हो गए और दोनों के बीच खतों का सिलसिला शुरु हो गया कुक गांधी से पहली बार 1933 में यरवडा जेल में मिली थी जिसके बाद गांधी ने उन्हें साबरमती आश्रम में भेज दिया । गांधी के जेल से छूटने के बाद कुक उनके शत्याग्रहों में शामिल होने लगीं ।

सरला देवी चौधरानी

सरला देवी चौधरानी

सरला देवी चौधरानी रविन्द्रनाथ टैगोर की भतीजी थी जो रविन्द्रनाथ टैगोर के तरह ही भाषा और संगीत में पारंगत थीं. सरला देवी के पति का नाम रामभुज दत्त चौधरी था जो एक स्वतंत्रता सेनानी थे । कहा जाता है कि जब रामभुज दत्त जेल में थे तब गांधी सरला देवी के घर पर ही रुके थे । उस समय वो लाहौर में रहती थीं । इसी बीच सरला देवी और महात्मा गांधी दोनों एक दूसरे के करीब आ गये थे । महात्मा गांधी सरला देवी की अपनी आध्यत्मिक पत्नी मानते थे । सरला देवी और महात्मा गांधी खादी आंदोलन को दौरान एक साथ पुरे भारत का भ्रमण किया था उनके इस रिश्ते की जानकारी उनके करीबियों को भी थी लेकिन वो दोनों ज़्यादा समय एक दूसरे के साथ नहीं रह पाए ।

मेडलिन स्लेड (मीराबेन)

मेडलिन स्लेड (मीराबेन)

मेडलिन स्लेड के पिता एडमंड स्लेड एक अंग्रेज अधिकारी थे । मेडलिन स्लेड को संगीत से काफी लगाव था वो जर्मन पियानोवादक और संगीतकार विथोवेन की दीवानी थी जिस कारण लेखक रोमैन रौलेंड के संपर्क में आईं और रोमैन ने महात्मा गांधी की जीवणी को लिखा था ऐसे में गांधी की ये पुस्तक मेडलिन के हाथों लगी जिसे पढ़ने के बाद वो गांधी के विचारधाराओं से प्रभावित हो गई और उनके रास्तों पर चलने का फैसला किया । इस घटना के बाद उन्होंने गांधी को खत के माध्यम से अपने अनुभव को साझा किया और आश्रम में आकर गांधी से मिलना चाहती थी । मेडलिन गांधी से पहली बार 1925 में मिली तो उनका वेशभूषा और रहने के तौर तरीकों से भी काफी प्रभावित हुई ।

डॉक्टर सुशीला नैय्यर

डॉ सुशीला नय्यर

सुशीला नैय्यर गांधी के सचिव प्यारेलाल की बहन थी इस लिए वो गांधी से अक्सर मिला करती थी लेकिन सुशीला की माँ को उनका गांधी से मिलना-जुलना पसंद नहीं था वाबजूद वो गांधी से मिला करती । जब सुशीला की पढ़ाई पूरी हुई तो उसके बाद वो गांधी की निजी डॉक्टर बन गई । महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्हें कस्तूरबा गांधी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया । कहा जाता है कि जब गांधी अपने ब्रह्मचर्य का परीक्षण कर रहे थे तो वहां सुशीला नैय्यर भी मौजूद थी ।

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