इतिहास के पन्नों से

एक ऐसा भारतीय जिसके नाम दर्ज है यह असाधारण रिकॉर्ड

भाषण देना और सुनना दोनों ही आम बात नही है और यह हर किसी के बस की बात भी नही है । भाषण वही दे सकता है जिसमें अपार जानकारियां समाहित हो, धैर्य हो और सबसे बड़ी बात जो जनता को अपनी बातों से बांधकर रख सके उनकों ज़रा सी भी ऊबन महसूस नही होने दें और ये सारे काम वही कर सकता है जो खुद को जनता के लिए समर्पित कर सके और वो जनता के बीच का हो ।

पिछले दिनों ऐसा ही एक भाषण चीन के राष्ट्रपति द्वारा दिया गया जिस में लोग उबासी लेने लगे थे यह 3 घंटे 30 मिनट का था और इसको सुनना हर जगह अनिवार्य कर दिया गया था यहां तक कि प्ले स्कूलों में भी और इस भाषण के दौरान ऐसी-ऐसी तस्वीरें वायरल हुई जिसे देखने के बाद ऐसा लग रहा था कि ये काम लोगों के इच्छा के विरुद्ध किया जा रहा था लेकिन लोगों के साथ मजबूरी थी वो इसे छोड़ कर भी नही जा सकते थे क्योंकि यह अनिवार्य था जिसे ना चाहते हुए भी सुनना था ।

आज तक का सबसे लंबा भाषण

Vengalil Krishnan Krishna Menon with jawahar lal nehru
           जवाहर लाल नेहरु के साथ वी.के कृष्ण मेनन

लेकिन एक ऐसा भारतीय नेता जिसने 8 घंटे लगातार भाषण दिया था और इसकी खास बात यह थी कि इससे लोग ना तो उबासी ले रहे थे और न ही यह अनिवार्य था जिसे आपको सुनना ही है फिर भी लोग उनकी बातों को एकग्रता से सुन रहे थे और ऐसा करने वाला असाधारण नेता वीके कृष्ण मेनन थे. जिनके नाम यह असाधारण रिकॉर्ड भी दर्ज है । वीके कृष्ण मेनन ने यह भाषण उस समय दिया था जब संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे ।

1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद मेनन को यूनाइटेड किंगडम में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया और वो इस पद पर 1952 तक बने रहे उसके बाद 1948 में जब उन्हें ब्रिटेन मे उच्चायुक्त नियुक्त किया गया उस समय भारत पाकिस्तान युद्ध के समय ब्रिटेन से इस्तेमाल किया गया सैन्य जीप खरीद कर सेना को देने के मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया लेकिन ऐसा कुछ भी साबित नही हो पाया ।

उसके बाद पुनः संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के रूप में नियुक्त किया गया और उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए गुट निरपेक्षता की नीति अपनाई और 23 जनवरी  1957 को कश्मीर पर भारत के रुख का बचाव करते हुए 8 घंटे का असाधारण भाषण दिया था. इनके द्वारा दिया गया भाषण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दिया गया आज तक का सबसे लंबा भाषण है और मेनन पद्म विभूषण पाने वाले पहले माल्यायी थे.

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