इतिहास के पन्नों से

जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए इस व्यक्ति को 30 हजार पौंड से किया गया था सम्मानित

जब आजादी की आग में सम्पूर्ण भारत जल रहा था तो प्रथम विश्व युद्ध देश की जनता में अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश और उनमें सकारात्मक ऊर्जा भड़ने का काम बखूबी कर रहा था । अब लोगों के जुबान पर एक ही शब्द थे कि मुझे किसी भी कीमत पर आजादी चाहिए और इसी आग को हवा देने का काम पंजाब में कुछ क्रांतिकारीयों द्वारा किया जा रहा था । जनता भी उनका साथ हड़तालों और आंदोलनो के माध्यम से दे रही थी। जिससे इन क्रांतिकारीयों में भी इनके उत्साह को देख एक अलग ही ऊर्जा का संचार हो रहा था ।

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लोगों मे आक्रोश इस लिए भी था क्योंकि अंग्रेजों द्वारा लोगों को जबरन सेना में भर्ती किया जा रहा था यूं कहलें की अंग्रेजी हुकूमत की नींव कमजोर पड़ने लगी थी और इस नींव को मजबूत करने का जिम्मा जनरल आर डायर को सौंपा गया और उससे पहले माइकल ओ डायर भी अपनी नींव बचाने की पुरजोर कोशिश कर रहा था और पंजाब के दो बड़े नेता डॉ सतपाल और डॉ सैफ़ुद्दीन किचलू को उसने बंदी बना लिया जिससे जनता और आंदोलित हो उठी और जगह-जगह हड़ताल और आंदोलन शुरू हो गए ।

इस सभा का आयोजन हंसराज नामक एक व्यक्ति ने की थी

उधर जनरल आर डायर ने पंजाब में अंग्रेजी हुकूमत को संभालते हुए सभा, हड़ताल और आंदोलनों पर रोक लगा दिया। लेकिन 13 अप्रैल 1919 को प्रशासन के मनाही के बावजूद अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक विशाल सभा का आयोजन किया गया । कहा जाता है कि इस सभा का आयोजन हंसराज नामक एक व्यक्ति ने किया था।  लेकिन वो बाद में सरकारी गवाह बन गया । इस सभा मे लगभग 20 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था । लेकिन डायर ने इस सभा को अपने आदेशों का उलंघन करार दिया और उसके बाद उसने सेना को निहत्थों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया और हर रास्ते को बंद कर दिया गया । इसमें हजारों की संख्या में लोग मारे गए और लगभग 1500 लोग घायल हुए ।

Jaliya wala Hatya Kand

इतने निर्मम हत्या के बाद भी जब अंग्रेजों का मन नही भड़ा तो उन्होंने पूरे पंजाब में मार्सल लॉ लागू कर दिया और पानी बिजली जैसे सुविधा को भी बंद कर दिया गया । इस निर्मम हत्या के लिए पंजाब के उपराज्यपाल माइकल ओ डायर ने  जनरल आर डायर को शाबाशी दी और उसे 30 हजार पौंड की धन राशि से उसे सम्मानित किया गया ।

इस घटना के बाद जब गांधी जी को लगने लगा कि पूरा माहौल हिंसक हो रहा है तो उन्होंने 18 अप्रैल को खेरा आंदोलन सत्याग्रह को वापस ले लिया ।

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Rahul Tiwari
राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.
http://www.thenationfirst.com

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