जरा हटके

बड़े काम की है खिचड़ी, इसी खिचड़ी ने जलाई थी चन्द्रगुप्त मौर्य के दिमाग की बत्ती

खिचड़ी एक ऐसा भोजन है जो सम्पूर्ण भारत के जायके को मिला कर बनाया जाता है कहीं का दाल और मसाला होता है तो कहीं का चावल और शायद यही कारण है कि यह सबसे ज़्यादा स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन है । खिचड़ी की खास बात है कि इसे ना ही धर्म से जोड़ा गया है और ना ही गरीबी और अमरी से, खिचड़ी को हर धर्म और हर तबके के लोग खाते है.

और जब आप बीमार होते हैं तो डॉक्टर्स भी खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं जिसका मुख्य कारण है कि यह बहुत ही सुपाच्य भोजन है और यह इंस्टेंट एनर्जी देती है और शायद इसी लिए खिचड़ी का सेवन सम्पूर्ण भारत मे किया जाता है और अब यह आसानी से पकने वाली खिचड़ी विश्व की थाली में पकने को तैयार है.

मोदी सरकार इसे वर्ल्ड फ़ूड ग्लोबल से जोड़ना चाहती है और सम्पूर्ण भारत के स्वाद को अब विश्व की थाली में परोसना चाहती है और इसकी शुरुआत दिल्ली में होने वाली फ़ूड कोर्ट में शामिल कर किया गया है इस फ़ूड कोर्ट में 800 किलो ग्राम खिचड़ी बनाने की तैयारी की जा रही है और इसे बनाने के बाद भारत के कोने कोने में गरीबों को परोसा जाएगा इस खिचड़ी को स्वाद देने का काम मशहूर सैफ संजीव को सौंपा गया है इस खिचड़ी को उस फ़ूड कोर्ट में मौजूद विदेशी सैलानियों को भी खिलाया जाएगा यूं कहलें की भारत मे पकने वाली खिचड़ी अब विदेशों में भी पकने को तैयार है ।

खिचड़ी ने जलाई थी चंद्रगुप्त मौर्य के दिमाग की बत्ती

कहा जाता है कि ये साधारण सी दिखने वाली खिचड़ी ही मौर्य साम्राज्य के स्थपना का कारण बना । दरअसल जब चंद्रगुप्त मौर्य ने पाटिलपुत्रा पर आक्रमण किया था तो इस आक्रमण में वो असफल हो गये थे और वहां से भागने के बाद वे एक घर मे छुप हुए थे.

उस घर मे मौजूद एक बुजुर्ग महिला ने उन्हें खिचड़ी खाने को दिया तो चंद्रगुप्त खिचड़ी को बीच से हीं खाने लगे तो वो महिला बोली तुम भी चंद्रगुप्त मौर्य की तरह मूर्ख हो अगर खिचड़ी खाना है तो साइड से खाओ अर्थात जब युद्ध जितना हो तो बाहरी सिमा पर आक्रमण करने चाहिए और यहीं से चंद्रगुप्त मौर्य को विजय की सिख मिली हाल की इस कहानी की पुष्टि इतिहास से नही किया जा सकता है लेकिन आसानी से पकने वाली खिचड़ी दिमाग की बत्ती ज़रूर जला सकती है जिस पे मोदी सरकार अब जोर दे रही है.

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