झारखंड पत्थलगड़ी खूंटी | patthalgadi tribal movement
जरा हटके

झारखंड का एक ऐसा जिला जहाँ चुनाव प्रचार का शोर बिल्कुल सुनाई नहीं देता

झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 50 किलोमीटर दूर बसा आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित एक जिला जिसका नाम 'खूंटी' है…इस जिले के अंतर्गत 100 ऐसे गांव आते हैं जो नक्सलवाद से प्रभावित है. उनके प्रवेश द्वार पर 'पत्थलगड़ी' लगी है, जिस पर लिखा है कि यहां के निवासी अपने नियमों के लिए प्रतिबद्ध है, आदिवासी किसी भी राज्य या केंद्र सरकार के प्राधिकार को खारिज करते हैं और सभी बाहरी चाहे वह नेता हो या फिर घूमने फिरने वाले पर्यटक उनका प्रवेश द्वार के भीतर आना मना है.

jharkhand khunti

भारत के और क्षेत्र के विपरीत ये क्षेत्र है, यहां के लोग अपने नियमों से बाधित हैं. इस पत्थलगड़ी के तहत जितने भी गांव आते है उन सभी के लिए वहां का ग्रामसभा या ग्रामीण पंचायत सर्वोच्च होता है. संविधान के प्रति उनकी कोई निष्ठा नहीं है क्योंकि यहां के लोग भारत सरकार के किसी भी नियम को नहीं मानते है.

झारखंड के 14 सीटों में से खूंटी भी एक सीट है जहां 6 मई यानी कि आज वोटिंग है. लेकिन मतदाताओं में एक अजीब सी चुप्पी है. आदिवासी कह रहे है कि वे मतदान का बहिष्कार करेंगे, वहां के लोगो ने ये दावा किया है कि 'हमारे अधिकार मुख्यमंत्री रघुवर दास ने छीन लिया है.


पत्थलगड़ी गांवों का नारा 'अधिकार नहीं तो वोट नहीं'

तो जब तक कोई अधिकार नहीं,तब तक कोई वोट नहीं… इन लोगो को चुनाव या भारत सरकार में कोई आस्था नहीं है… क्योंकि उनका कहना है कि हमारे गाँव मे कोई भी सुविधा नहीं है, सरकार ने कभी भी हमारे लिए कुछ नहीं किया…हम बिना किसी हस्तक्षेप के शांतिपूर्ण तरीके से रहना चाहते है.

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