ऐसे ही राजनीति

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस बिगाड़ सकती है बीजेपी का समीकरण

लगातार 20 जीत दर्ज कर फर्स से अर्स तक का सफर तय करने वाली पार्टी भारतीय जनता पार्टी को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एक बार फिर जोरदार झटका लग सकता है तो वहीं कांग्रेस इस बार भी बाजी मरते नज़र आ रही है  । कर्नाटक विधानसभा चुनाव होने में महज एक महीने ही शेष है 12 मई को चुनाव होने हैं और 15 मई को परिणाम आनेवाले हैं ।

हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्षी दोनों ही इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक चुकी है और अपने-अपने जीत की  दावा दोनों ही पार्टियां कर रही हैं । इस चुनाव में एक तरफ लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस बीते दिनों के इतिहास को बदलना चाहेगी तो दूसरी तरफ बीजेपी एक बार फिर अपना परचम लहरा कर इतिहास लिखने की कोशिश करेगी । खैर वक़्त ज़्यादा नहीं है अगले महीने ही परिणाम सब के सामने होगा ।

तमाम हलचलों के बीच आजतक ने कर्नाटक के किंग कौन नाम से एक ओपिनियन पोल चलाया जिसमें कांग्रेस अपने  लागतर हार का इतिहास को बदलते नज़र आ रही है तो बीजेपी  अपने बीते सालों के इतिहास को याद कर सकती है ।

आपको बता दें कि कर्नाटक विधानसभा में कुल 225 सीटे है जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी यानी कांग्रेस को 90 से 101 सीट मिलने के आसार दिख रहा हैं तो वहीं बीजेपी को 78 से 86 सीटों पर ही संतोष करना पर सकता है ।हलाकि पिछले विधानसभा से इस बार बीजेपी को 20 से 25 सीटों का फायदा हो सकती है इसके बाद जेडीएस गठबंधन को 34 से 43 सीटें मिल सकती है

तत्कालीन समय मे कांग्रेस के पास 122 ,बीजेपी के पास 43 जेडीएस के पास 29, अन्य के पास 14 सीटें है जबकि 16 सीटें खाली हैं तो वहीं इस विधानसभा में एक सीट एंग्लो इंडिया समुदाय से भी रिजर्व है ।

इस ओपिनियन पोल को इंडिया टुडे ग्रुप और कर्वी इनसाइट्स ने मिल कर 17 मार्च से 15 अप्रैल तक 224 विधानसभा क्षेत्रों में चलाया है जिसमे 38 फीसदी ग्रामीण और 62 फीसदी शहरी लोगों नें भाग लिया था । इस सर्वे में 52 फीसदी लोगों ने कांग्रेस द्वारा खेले गए लिंगायत कार्ड को मुद्दा बनाया है जबकि 48 फीसदी लोगों ने इसे मुद्दा मनने से इनकार किया है ।

इस सर्वे में 33 फीसदी लोगों का मानना है कि सिद्धिरामैया एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे जबकि 26 फीसदी लोगों का मानना है कि बीएस येदुरप्पा CM की कुर्सी तक का सफर तय कर सकते हैं । तो वहीं इस सर्वे में 73 फीसदी लोगों ने कन्नड़ को अनिवार्य भाषा बनाने का सिद्धारमैया सरकार द्वारा लिए गए फैसले का समर्थन किया है तो वहीं 59 फीसदी लोगों को लगता है कि कर्नाटक का अपना अलग झंडा होना चाहिए ।

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