sadanand sambuddha | सदानंद सम्बुद्ध
ऐसे ही

बिहार के बांका जिले का वो शख्स जिन्होंने अपनी सारी उम्र लोगों की सेवा में गुजार दी

बिहार के बांका जिले में जन्में एक ऐसी शख्सियत से हम आपको आज रूबरू करवाने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी सारी उम्र जन सेवा में गुजार दी जनता की सेवा करना वो अपना पहला कर्तव्य समझते थे और इसकी नसीहत वो अपने पुत्रों को भी दिया करते थे वो हमेशा कहा करते थे कि जन की आवाज़ बनो कभी भी खुद के बारे में मत सोचो कभी खुद के लिए मत जियो.

ऐसे महान विचारधारा से खुद को पोषित करने वाले इस व्यक्ति का नाम है स्व. सदानंद सम्बुद्ध जिनका जन्म 29 मई 1951 को बांका जिला के फुल्लीडुमर गांव में हुआ था . लेकिन कहा जाता है की ईश्वर हमेशा अच्छे, कर्मठ और सुयोग्य व्यक्तियों को जल्द ही अपने पास बुला लेता है और शायद ईश्वर को स्व. सदानंद संबुद्ध का हमारे बीच रहना नागवारा गुजरा और हमसे इन्हें 24 जनवरी 2019 छीन लिया.

ऐसी महान शख्सियत वाले इस व्यक्ति का आज बांका जिला के फुल्लीडुमर में उनकी स्मृति के रूप में उनका जनमोत्स्व का आयोजन उनके पुत्र दीपंकर विश्वजीत के द्वारा किया गया है. उनके पुत्र दीपंकर विश्वजीत उनके ही रास्तों पर चलते हुए सामाज सेवा करने के तौर पर जरूरतमंद, गरीब, शोषित शोषित,वंचित और नि:सहाय लोगों के बीच धोती एवं साड़ी वितरण कर जन्मदिन मनाने का फैसला किया है.

पुत्र दीपांकर विश्वजीत कहते हैं 24 जनवरी 2019 मेरे लिए काला दिन के रूप में साबित हुआ क्योंकि उस दिन मेरे सूत्रधार परमपूज्य पिताजी हम सबों को छोड़कर चले गए. आज मैं जिस भी मुकाम पर हूँ उनकी ही देन है. मैं सदैव उनके आदर्शों पर चलने की कोशिश करता हूँ .

वे सदैव मुझे अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रेरित करते थे जैसे वो लोगों के बीच मे रहना पसंद करते थे लोगों की समस्याओं का समाधान करना अपना कर्तव्य समझते थे इसके लिए वो हमेशा मुझे भी प्रेरित करते थे. आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़ी यादें हमेशा मुझे उनके बताए मार्ग पर चलने के लिए बाध्य करती है. सामाजिक परिवेश एवं सामाजिक सेवा में उनकी गहरी रुचि रहती थी.

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Rahul Tiwari
युवा पत्रकार
http://www.thenationfirst.com

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