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ना जय जवान, ना ही जय किसान!

जय जवान जय किसान भारत का एक प्रसिद्ध नारा है। यह नारा सबसे पहले 1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था।

जिसके कारण भारत ने पाकिस्तान से युद्ध भी जीता साथ ही देश में हरित क्रांति का आरंभ भी हुआ। लेकिन लाल बहादुर शास्त्री जी के निधन के पश्चात शायद यह नारा भी मर गया।

तभी तो जहां एक तरफ देश की सीमा पर जवान मर रहे है वहीं दूसरी तरह अन्नदाता खुद अन्न के एक एक दाने का मोहताज है। लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।लगातार कई दिनों से मध्यप्रदेश के मंदसौर में अन्नदाता अपनी बात सरकार तक पहुंचने के लिए हड़ताल कर रहे है लेकिन उनकी सुनने वाला कोई मिला ।

जिसके बाद किसनों के आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया। जिसके बाद प्रशासन का रवैया देखिए एक तो किसानों की मदद नहीं कर सकते थे। उपर से उन मासूम किसानों पर गोलियां चलवा दी। जिसमें की कई किसानों की मौत हो गई। वाह रे मोदी सरकार आप खुद भूल गए कि आप की आप जनता से क्या वादा कर के सत्ता में आए थे।

दरअसल किसान अपनी 20 सूत्रीय मांगों को लेकर एक जून से हड़ताल कर रहे हैं. उनकी मांग है कि
1.स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए
2.किसानों का कर्ज माफ़ किया जाए
3.किसानों को उचित समर्थन मूल्य दिया जाए
4.मंडी का रेट निर्धारण हो
5.किसानों को पेंशन दी जाए
ये मांगे काफी हद तक सही भी है क्योंकि मोदी सरकार ने सत्ता में आने से पहले किसानों की कर्ज़ माफी की बात भी की थी लेकिन इसके बावजूद भी उत्तर प्रदेश में सिर्फ कुछ किसानों के कर्ज माफ हुआ लेकिन अव पूरे देश में बहुत से किसान बाकी है। ये भी कहना गलत नहीं होगा कि कर्ज माफी चुनावी बातें थीं जो चुनाव खत्म होते ही समाप्त हो गई।

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वहीं मंदसौर में हुए फायरिंग को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस को न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही मृतकों को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की गई है

दरअसल नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के मुताबिक वर्ष 1995 से 2013 तक देश में 2 लाख 96 हजार 438 किसानों ने आत्महत्या कर ली और वर्ष 2014 में 5650 किसानों ने खुदकुशी की थी। यानी हमारे देश में औसतन करीब हर दो घंटे में तीन किसान आत्महत्या कर लेते हैं.. यानी हर दो घंटे में तीन बार जय जवान जय किसान के नारे की मौत होती है।

वहीं दूसरी तरफ जवान सरहद पार शहीद हो रहे है लेकिन सरकार दुश्मन देश पाकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने का नाम नहीं ले रही है। सरकार के पास अपना गुणगान करने के लिए सिर्फ एक सर्जिकल स्ट्राइक ही है। अगर ये हड़ताल इस प्रकार चलता रहा और किसानों की मौत होती रही थी वो दिन भी दूर नहीं की शहर वासियों को अनाज के एक एक दने के लिए मोहताज होना पड़ेगा।

पीएम विदेशों का दौरा कर रहे है चलिए वो भी देश हित में अपनी जगह सही है लेकिन मोदी साहब शायद आप भूल रहे है कि सपने एं भोले भाले किसानों से क्या वादा किया था। लेकिन सरकार बने पूरे तीन साल हो गए लेकिन आज तक अपने वो वादे पूरे नहीं किए। क्या वो वादे महज चुनावी स्टंट थे।

सर अगर किसान खेती करना बंद कर दें तो हमारे देश की जीडीपी में भी बहुत गिरावट आएगी अगर अगर किसी उद्योग से कुछ पैदावार ही ना हो तो। अगर किसान इसी तरह आत्महत्या करता रहा हमारे जवान बोर्डर पर मरते रहे तो अपके विदेश जा देश को सशक्त बनाने से क्या फायदा जब अपके देश में कोई बचे ही ना।ना कोई जवान ना कोई किसान। जरा सोचिए साहब ।

वहीं दिल्ली के जंतर मंतर पर तमिलनाडु से आए 140 किसानों ने अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। दरअसल तमिलनाडू में 140 साल में सबसे बड़ा सुखा पड़ा था। जिससे खेत ही नहीं पीने के पानी की भी समस्या बढ़ गई थी। एक किसान ने बताया कि पीने के पानी के लिए उनको कई किलोमीटर तक पैदल सफर करना पड़ता है।

किसानों ने दिल्ली में पहले दिन अर्धनग्न होकर प्रधानमंत्री दफ्तर से राष्ट्रपति भवन की तरफ मार्च निकाला। हर दिन किसानों ने अलग अलग तरीके से प्रदर्शन किया। एक दिन तो दिल्ली स्टेशन से चूहे पकड़ कर लाए पर  मुंह में दबा कर प्रदर्शन किया तो एक दिन नग्न होकर प्रदर्शन किया। जिसके बाद किसानों के सामने सरकार को झुकना पड़ा।

और तमिनाडु के मुख्यमंत्री के आश्वाशन पर किसानों ने अपनी हड़ताल खत्म की। अब देखना होगा कि मंदसौर के किसानों को कब तक न्यान मिलता है और कब तक उनकी हड़ताल जारी रहती है।

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