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आयोध्या विवाद पर बाबा राजीवलोचन दास से द नेशन फर्स्ट के तीखे सवाल

आयोध्या विवाद एक ऐसा धार्मिक विवाद है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है इस विवाद में आये दिन नए नए मोड़ आ रहे हैं । एक तरफ यह मामला कोर्ट में अटका हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे को कोर्ट के बाहर सुलझाने की जदोजहद भी जारी है । एक निजी चैनल ने एक स्टिंग किया है जिसमे धर्म गुरु श्री श्री रविशंकर और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद वली रहमानी के बीच आयोध्या विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही है ।

दरअसल इस स्टिंग में श्री श्री रविशंकर जी ने मोहम्मद वली को पैसे देकर इस मामले को रफा दफा करने की बात की है.. पैसे की रकम 1 करोड़ से लेकर 20 करोड़ तक हो सकती है । लेकिन जब मामला सामने आया तो दोनो ने इस बात को एक सिरे से खारिज कर दिया है ।

इसी मुद्दे पर जब द नेशन फर्स्ट के एडिटर राहुल तिवारी ने आयोध्या के एक स्थानीय बाबा राजीवलोचन दास से बात की है जिसमे कुछ बातें सामने आई । बातचीत के कुछ अंश हुबहू प्रश्नोत्तर के रूप में निचे निम्नलिखित है :

प्रशन : आयोध्या विवाद पर आपकी क्या राय है ?

उत्तर: ये विवाद लोगों के द्वारा किया जा रहा है और इस विवाद का हल राम मंदिर के निर्माण से हीं होगा ।

प्रशन : इस विवाद को लोगों ने उठाया है या फिर इस पर राजनीतिक रोटी सेकी जा रही है ?

उत्तर: राजनीति तो कहीं से जुड़ जाती है इस विवाद को समाज विध्वंसक लोगों द्वारा फैसला जा रहा है । उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक पार्टियां नहीं थी तब भी ये विवाद जोरों पर था । और राम मंदिर बनाने की संघर्ष जारी थी और जारी है ।

प्रशन : मंदिर बनवाने के लिए पैसों की पेशकश कहाँ तक जायज है ?

उत्तर: वैसी कोई बात नहीं है हां अगर कहीं ऐसी बात हो भी रही है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है इस काम के लिए अगर किसी भी तरह से प्रयास हो रहा है तो उसे पूरा करना ज़रूरी है ।

प्रशन : किसी भी ढंग से का क्या मतलब है ?

उत्तर: इस विवाद को किसी भी तरीके से खत्म करना ज़रूरी है चाहे वो साम दाम से हीं क्यों ना हो इसमें शायद बाबा जी दंड और भेद शब्द को जोड़ना भूल गए । क्योंकि साम दाम के बाद दंड भेद हीं आता है ।

प्रशन : जब हिन्दू वर्षों से राम मंदिर पर दावा कर रहे हैं कि यहां राम मंदिर हीं था और राम मंदिर हीं बनेगा तो फिर इसके लिए पैसा देना उचित है ?

उत्तर: अगर सामने वाला पैसा लेकर अगर हमारा पीछा छोर दे तो इसमें हर्ज़ हीं क्या है । लड़ाई होने से अच्छा है वरना जो है सो तो है हीं और वो नही मने हो जो होना है वो तो हो कर हिं रहेगा ।

प्रशन : हम कोर्ट के फैसले का भी तो इंतज़ार कर सकते हैं ?

उत्तर: अगर कोर्ट के बाहर सुलह करने का प्रयास किया जा रहा है तो होना चाहिए । छोटे छोटे कामों के लिए सुलहनामें होते रहे हैं फिर तो ये बड़ा काम है इस लिए इसे किसी भी तरह से करना जरूरी है ।

बाबा से बात करने के बाद ये साफ हो गया है कि वो आयोध्या में सिर्फ राम मंदिर ही बनाना चाहते हैं चाहें उसके लिए साम दाम दंड भेद का तरीका ही क्यों ना अपनाना पड़े बनेगा तो राम मंदिर ही ।

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