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चीन के दखलअंदाजी से फिर गरमाई बलूचिस्तान की आजादी की जंग

आप लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण जरूर याद होगा जिसमें उन्होंने बलूचिस्तान का जिक्र किया था।उस समय बलूचिस्तान के लोगों की आजादी की मांग भारत के कोने-कोने में पहुंची थी।एक बार फिर से यह मसला वैश्विक पटल पर गरमाता दिख रहा है,आपको बताते चलें कि बलूचिस्तान में 1948,1958, 1973 और 2000 से अभी तक 5 बड़े कोशिश आजादी के लिए किए जा चुके हैं तथा हालिया लड़ाई और ज्यादा मुखर हुई है।

चीन के द्वारा पाकिस्तान में सीपेक के तहत 62 बिलियन डॉलर की पूंजी निवेश की जा रही है जिसके तहत कई परियोजनाओं मसलन बिजली घर से लेकर ग्वादर पोर्ट से चीन की सीमा तक सड़क बनाने की प्रक्रिया भी चल रही है।ग्वादर बंदरगाह बलूचिस्तान में ही पड़ती है और इस कारण इस परियोजना को लेकर बलूचिस्तान के आम लोगों में काफी आक्रोश है।

पिछले वर्ष 15 नवंबर को सीपेक परियोजना में काम करने वाले पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के 15 मजदूरों की हत्या की गई थी जिसकी जिम्मेवारी वहां के आजादी के लिए लड़ने वाली बड़ी सशस्त्र गुट बीएलएफ यानी कि बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने ली थी। बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाले ससस्त्र संगठनों में बीएलएफ के अलावा बीआरए और एलईबी भी शामिल है जो लगातार पाकिस्तान के सैनिकों और चीन के परियोजना पर हमला कर रहे हैं जिससे चीन की पूरी परियोजना अधर में लटकी दिख रही है।

इसी के मद्देनजर 19 फरवरी 2018 को चीन ने बलूचिस्तान के आजादी पसंद शसस्त्र विद्रोहियों से बात करने की वकालत की जिसे वहां के बड़े सशस्त्र संगठन बीएलएफ के प्रमुख डॉक्टर अल्लाह नजर बलोच ने और बीएलए के प्रमुख असलम बलोच ने बातचीत के रास्ते को सिर्फ धोखा बताया और परियोजना को बीच में रोकने की बात की।अंतरराष्ट्रीयटेन में लंदन के सड़कों के किनारे और टैक्सियों पर "वर्ल्ड बलोच फोरम" ने फ्री बलूचिस्तान का विज्ञापन चलाकर दुनिया को यह बताने की कोशिश की है कि हम अब आजादी चाहते हैं।

इस प्रकार के विज्ञापन अमेरिका में भी टाइम्स स्क्वायर पर चलाई गई जो यह दर्शाती है कि बलूचिस्तान की आजादी की जंग और मुखर हुई है।बीएलएफ के आनलाईन प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार सिर्फ मार्च महीने में 49 हमलों में पाकिस्तान के 96 सैनिकों को बीएलएफ ने मार गिराया है। वही एक अन्य सशस्त्र संगठन बीएलए के द्वारा जारी आनलाईन प्रेस विज्ञप्ति में जनवरी से लेकर मार्च महीने के बीच 17 पाकिस्तानी सैनिकों को 16 हमलों में मार गिराया गया है।

बलूचिस्तान के गांधी कहे जाने वाले मामा कदीर बलोच जिन्होंने क्वेटा से इस्लामाबाद तक 2000 किलोमीटर की पदयात्रा किया था,उनका इसी जनवरी के महीने में भारत आगमन हुआ था,मामा कदीर बलोच के अनुसार पाकिस्तान की सेना और आईएसआई बलूचिस्तान के 45000 लोगों के अपहरण में शामिल है जिनमें से 25000 बलोच लोग अभी भी लापता हैं उन्होंने बलूचिस्तान के बारे में भारतीय मीडिया की खामोशी पर भी सवाल उठाएं और कहा कि पाकिस्तान के अलावा अब हमें चीन का कॉलोनी भी बनाने की कोशिश की जा रही है जिसमें संयुक्त राष्ट्र संघ को दखल देना चाहिए।

उनके अनुसार पाकिस्तान की सेना वहां की युवाओं को अगवा करती है और मारने के बाद लाशों में ड्रिल करती है जिसकी शिनाख्त करना भी मुश्किल हो जाता है।अब देखना दिलचस्प होगा कि भारत का रूख इस मुद्दे पर क्या रहता है। क्या भारत संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार संगठन में बलूचिस्तान के अंदर हो रहे मानवाधिकार हनन को उठाती है या या मामला ज्यों का त्यों बना रहता है.

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