44 जवानों की शहादत पर रो रहा हिंदुस्तान, नक्शे से मिटा दो पाकिस्तान
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44 जवानों की शहादत पर रो रहा हिंदुस्तान, नक्शे से मिटा दो पाकिस्तान

"लोग मोहब्बत-ए-इजहार करते रह गए
उन्होंने अपनी जान देकर हमें कर्जदार बना दिया"


कल पूरा भारत वैलेंटाइन डे मनाने या ना मनाने के द्वंद्व में उलझा हुआ था। दिन हमेशा की तरह शांति से बीत रहा था। सुबह में बारिश नें देश के कई हिस्सों को भिंगाया, मानो किसी अनहोनी की आशंका से डरा आसमान रो रहा था। जम्मू और श्रीनगर (कश्मीर) को जोड़ने वाला राजमार्ग बर्फबारी के कारण एक सप्ताह तक बंद रहनें के बाद ठीक एक दिन पहले 13 फरवरी को खुला था।

सीआरपीएफ के कई बटालियन के 25 सौ से अधिक जवान, 70 से ज्यादा गाड़ियों में सवार होकर जा रहे थे। सब छुट्टियां मनाकर वापस ड्यूटी पर लौट रहे थें। कोई अपनी मां को जल्द लौटने का वचन देकर लौटा था तो कोई अपने पत्नी और बच्चों से जल्द मिलने का वादा करके। लेकिन काफ़िले में शामिल जवानों को क्या पता था कि पहले से नापाक मंसूबे लिए कायर आतंकी उनकी जान लेने की फिराक में बैठा हुआ है।

इतना बड़ा काफिला जैसे हीं अवंतीपोरा के गोरीपोरा पहुँचा, जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती अफजल ब्रिगेड का आतंकवादी आदिल अहमद स्कॉर्पियो में 320 किलो आईईडी विस्फोटक लेकर 54वीं बटालियन की बस को टक्कर मार दी। ब्लास्ट के कारण 54वीं बटालियन का बस मलबे में बदल गया वहीं उसके आगे पीछे चल रहे 17वीं और 92वीं बटालियन के बस सहित कई गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हमारे 44 जवान अपनें वतन और हम देशवासियों की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।

कोबरा के नाम से मशहुर यह जवान दुश्मनों को गोलियों से नहीं अपने बाजुओं के प्रहार से मारने का शौक रखता था

पूरे देश की आँखें नम है, अपनें इन वीर जवानों के शहादत का बदला लेनें की आग धधक रही है, नींद उड़ी हुई है। आखिर अपने वतन की रक्षा करते हुए ये 'गुमनाम' वीर, सदा के लिए चिरनिंद्रा में सो गए। ऐसी नींद जहाँ से अब वे नहीं आयेंगे, आएँगी तो बस उनकी याद। पूरा देश संकट की इस घड़ी में एकजुट है। सब सरकार से एक हीं दरख्वास्त कर रहे हैं कि एक बार आदेश दे दो, पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा देंगे। कब तक हम खोते रहेंगे अपने वीरों को, कब तक सहते रहेंगे हम पाकिस्तान के नापाक हरकतों को।

एक सप्ताह पहले कश्मीर पुलिस के एसएसपी द्वारा एक लेटर के जरिए सीआरपीएफ को सूूचित किया गया था कि बटालियन को उनकी जगह पर डिप्लॉय करने से पहले क्षेत्र के सही से निरीक्षण कर लें, आईईडी ब्लास्ट की संभावना है। अगर इसपर ध्यान दिया गया होता तो आज हमारे 44 शूरवीर जिंदा होते। दुनिया के लगभग सभी बड़े देशों ने संकट की इस घड़ी में भारत के साथ होने की बात कहीं है। लेकिन पाकिस्तान का पेट भरके आतंकवादियों को समर्थन देने वाला चीन अबतक खामोश है। अब एक हीं लाइन सबके जेहन में है :-


'निंदा,याचना नहीं अब केवल रण होगा
सुन ले पाकिस्तान, अंजाम इसका बहुत भीषण होगा'

नमन उन वीरों को, जिन्होंने अपनें प्राण न्योछावर कर दिए

  • 1. जयमाल सिंह- 76 बटालियन
  • 2. नसीर अहमद- 76 बटालियन
  • 3. सुखविंदर सिंह- 76 बटालियन
  • 4. रोहिताश लांबा- 76 बटालियन
  • 5. तिकल राज- 76 बटालियन
  • 6. भागीरथ सिंह- 45 बटालियन
  • 7. बीरेंद्र सिंह- 45 बटालियन
  • 8. अवधेष कुमार यादव- 45 बटालियन
  • 9. नितिन सिंह राठौर- 3 बटालियन
  • 10. रतन कुमार ठाकुर- 45 बटालियन
  • 11. सुरेंद्र यादव- 45 बटालियन
  • 12. संजय कुमार सिंह- 176 बटालियन
  • 13. रामवकील- 176 बटालियन
  • 14. धरमचंद्रा- 176 बटालियन
  • 15. बेलकर ठाका- 176 बटालियन
  • 16. श्याम बाबू- 115 बटालियन
  • 17. अजीत कुमार आजाद- 115 बटालियन
  • 18. प्रदीप सिंह- 115 बटालियन
  • 19. संजय राजपूत- 115 बटालियन
  • 20. कौशल कुमार रावत- 115 बटालियन
  • 21. जीत राम- 92 बटालियन
  • 22. अमित कुमार- 92 बटालियन
  • 23. विजय कुमार मौर्य- 92 बटालियन
  • 24. कुलविंदर सिंह- 92 बटालियन
  • 25. विजय सोरंग- 82 बटालियन
  • 26. वसंत कुमार वीवी- 82 बटालियन
  • 27. गुरु एच- 82 बटालियन
  • 28. सुभम अनिरंग जी- 82 बटालियन
  • 29. अमर कुमार- 75 बटालियन
  • 30. अजय कुमार- 75 बटालियन
  • 31. मनिंदर सिंह- 75 बटालियन
  • 32. रमेश यादव- 61 बटालियन
  • 33. परशाना कुमार साहू- 61 बटालियन
  • 34. हेम राज मीना- 61 बटालियन
  • 35. बबला शंत्रा- 35 बटालियन
  • 36. अश्वनी कुमार कोची- 35 बटालियन
  • 37. प्रदीप कुमार- 21 बटालियन
  • 38. सुधीर कुमार बंशल- 21 बटालियन
  • 39. रविंदर सिंह- 98 बटालियन
  • 40. एम बाशुमातारे- 98 बटालियन
  • 41. महेश कुमार- 118 बटालियन
  • 42. एलएल गुलजार- 118 बटालियन

 

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Ankush M Thakur
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
http://www.thenationfirst.com

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