central government advised media to stop using word 'dalit'| दलित शब्द
देश

मोदी सरकार को 'दलित' शब्दावली से दिक्कत, मीडिया को सुनाया फरमान

भारतीय राजनीति में नेताओं का सबसे बड़ा मोहरा दलित शब्द को माना जाता है जिसके जरिये वो पिछड़े वर्ग की राजनीति करते हैं और लगभग वो अपने हर भाषण में इस शब्द का प्रयोग करते हैं । लेकिन पिछले दिनों बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस शब्द के प्रयोग पर रोक लगा दी है । कोर्ट ने तर्क दिया है कि दलित शब्द के प्रयोग से वो आहत होते हैं उनकी गरिमा को चोट पहुँचती है इस लिए दलितों के लिए शिड्यूल्ड कास्ट का प्रयोग करें ।

आपको बता दें कि इस शब्द के इस्तेमाल करने के लिए केवल आम जनता और मीडिया हाउसेज को रोका गया है नेता चाहें तो इस शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं दलितों की राजनीति कर सकते हैं दलित के नाम पर टिकट दे सकते हैं । नेताओं के इस्तेमाल से शिड्यूल्ड कास्ट को कोई ठेंस नहीं पहुंचती है ।

क्यों लगाया गया रोक ?

7 अगस्त 2018 को सूचना एवं प्रशारण मंत्रालय के तरफ से एक आदेश पारित किया गया जिसमें कहा गया कि अब कोई भी प्रिवेट मीडिया हाउस दलित शब्द का प्रयोग नहीं करेगा उसके जगह शिड्यूल्ड कास्ट का प्रयोग करें । सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की निर्देशों का हवाला दिया है ।

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक 6 जून को कुछ निर्देश दिए थे जिसमें मीडिया द्वारा दलित शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई थी जिसके बात बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार मीडिया को इस शब्द के इस्तेमाल न करने की हिदायत दे सकती है और इसी लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मीडिया हाउसेज को इस शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी ।

क्या है इसका इतिहास ?

दलित शब्द का निर्माण दलन शब्द से हुआ है जिसका अर्थ होता है दबा कुचला । अगर इस शब्द के इतिहास पर नज़र डालें तो इस शब्द का इस्तेमाल हमारे संविधान में कहीं नहीं किया गया है । उनके संबोधन के लिए शिड्यूल्ड कास्ट शब्द का जिक्र किया गया है । शिड्यूल्ड कास्टों के लिए महात्मा गांधी ने हरिजन शब्द का प्रयोग किया था लेकिन शिड्यूल्ड कास्टों को इस शब्द के इस्तेमाल से लगता था कि उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है इस शब्द से अपमान किया जा रहा है इस लिए अब हरिजन शब्द का इस्तेमाल ना के बराबर ही होता है ।

मूल रूप से दलित शब्द का इस्तेमाल कब किया गया और पहली बार किसने की इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता है लेकिन काफी छान बिन करने के बाद पता चलता है कि इस शब्द का इस्तेमाल ज्योतिबाफुले ने 19वीं शताब्दी में की किया था जिसके बाद भीम राव अम्बेडकर ने कई बार इस शब्द का इस्तेमाल अपने भाषणों के दौरान किया था ।

1,028 total views, 1 views today

Facebook Comments

Leave a Reply