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दिवाली से पहले ही बढ़ा इन दस शहरों का प्रदूषण रिकॉर्ड, उत्तरप्रदेश के आठ शहर शामिल

यूपी के आठ शहर देश के उन 10 शहरों में शामिल हैं जहां प्रदूषण सबसे ज्यादा है यानी कि देश के टॉप-10 सबसे प्रदूषित शहरों में 8 उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि कानपुर की हवा देश भर में सबसे जहरीली है. ये पूरे देश के लिए चिंता का विषय है समय रहते अगर इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो धुंध और धुंए का मेल आने वाली दिनों मे बेहद खतरनाक रूप ले लेगा. अभी से दिल्ली एनसीआर का आबोहवा जहरीला हो चूका है.

चारों तरफ सिर्फ प्रदूषण का ही कहर है लेकिन लगाम लगाने के लिए किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री जमिनी अस्तर काम करते नहीं दिख रहा. आलम यह है की हम बाहर नहीं निकल सकते. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश के 10 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची जारी की है, जिसमें उत्तर प्रदेश के 8 शहर शामिल हैं और इसमें दिल्ली एनसीआर सबसे ज्यादा प्रदूषित है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मानें तो आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा और खराब होगी और दिवाली तक दिल्ली के गैस चैंबर बनने की आशंका है..

धुंध धूल और दिल्ली धुआं-धुआं

दिवाली अभी दूर है. धुंध भी सही से आई नहीं है लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली वालों से साफ कह दिया है 1 नवंबर से 10 नवंबर तक सुबह के वक्त में घर से निकलने खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि बीते रविवार को दिल्ली में धुंध की चादर छाई हुई थी, और ये दिन इस मौसम का सबसे ज्यादा प्रदूषित दिन था. रविवार से लेकर अब तक लगातार हवा जहरीली हो रही है. सीपीसीबी के आंकड़ो मुताबिक दिल्ली में रविवार सुबह कुल वायु गुणवत्ता सूचकांक 381 दर्ज किया गया जो बेहद खराब की श्रेणी में आता है.

0 से 50 के बीच एक्यूआई अच्छा माना जाता है और 51 और 100 के बीच संतोषजनक, लेकिन दिल्ली अभी से 381 को पार करने लगी है, दिल्ली से ज्यादा घातक गाजियाबाद है यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 415 पर दर्ज हुई, इसके साथ ही गुरुग्राम का वायु गुणवत्ता सूचकांक भी 403 के स्तर पर पहुंचा, वहीं नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 385 रहा, जिसे बेहद खराब माना जाता है.

दिल्ली पर धुंध और धुएं के मिलन से पैदा हुए स्मॉग ने सैंकड़ों बिमारियों को जन्म दे दिया है. डॉक्टरों के मुताबिक जहरीली हवा में रहने से अस्थमा, क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस, स्किन अलर्जी, आंखों में जलन के साथ ही सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. कई तरह की अलर्जी और फेफड़ों के कैंसर तक का खतरा होता है, मस्तिष्क और गुर्दे पर भी असर पड़ता है. दिल्ली एनसीआर के लिए नवबंर खौफ बनकर आएगा, वो खौफ जिसका अतीत भी धुंधला है और भविष्य भी धुंधला है. जहरीली हवा बचने के लिए सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है.

ये वो उपाय हैं जो आपकों उस जहर से बचा सकते हैं जो हर सांस के साथ आपके खून में उतर रही है. राजधानी के आसमान पर सफेद धुंध की चादर बिछनी शुरू हो गई है. एक ऐसी चादर जो दिल्ली एनसीआर को बीमार बना रही है. फेफड़े हवा नहीं जहर सोख रहे हैं, आलम ये है कि जीना मुहाल है. हवा में घुले जहर से एक-एक सांस भारी हो

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