SC/ST एक्ट में एकबार फिर सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, केंद्र सरकार से 6 हफ्ते के भीतर मांगा जवाब
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SC/ST एक्ट में एकबार फिर सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, केंद्र सरकार से 6 हफ्ते के भीतर मांगा जवाब

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा sc-st एक्ट में किये गये संसोधन के खिलाफ आज शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से 6 हफ्तों के भीतर इस पर जवाब माँगा है . जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्यों न हम sc-st एक्ट वाले इस संसोधित कानून पर रोक लगा दें ?

दरअसल वकील पृथ्वी राज चौहान और प्रिया शर्मा ने sc-st कानून में केंद्र सरकार द्वारा किये गये संसोधन को असंवैधानिक करार देते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कहा कि हम केंद्र सरकार की राय लिए बिना इस कानून पर रोक नही लगा सकते. कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए केंद्र से 6 हफ्तों के भीतर इस पर अपना पक्ष रखने को कहा है .

पृथ्वी राज चौहान और प्रिया शर्मा ने याचिका दायर करते हुए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि कोर्ट इस मामले में 20 मार्च को दिए अपने फैसले को लागू करे . साथ ही एससी-एसटी एक्ट में संशोधन- "दलितों को सताने पर तत्काल गिरफ्तारी होगी और अग्रिम जमानत भी नहीं मिल पाएगी". कर बनाये गये नए कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी .

सुप्रीम कोर्ट का ये था फैसला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च 2018 को दिये गए अपने फैसले में एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कुछ दिशा निर्देश जारी किये थे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एससी एसटी अत्याचार निरोधक कानून में शिकायत मिलने के बाद तुरंत मामला दर्ज नहीं होगा, इस तरह के मामलों में डीएसपी पहले शिकायत की प्रारंभिक जांच करके पता लगाएगा कि मामला झूठा या गलत मंशा से प्रेरित तो नहीं है. इसके अलावा इस कानून में एफआईआर दर्ज होने के बाद अभियुक्त को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.

साथ ही सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले सक्षम अधिकारी और सामान्य व्यक्ति की गिरफ्तारी से पहले एसएसपी की मंजूरी ली जाएगी. इसके अलावा कोर्ट ने अग्रिम जमानत का भी रास्ता खोल दिया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे देश भर में दलितों ने इस फैसले का जमकर विरोध किया था, जिसके बाद सरकार ने इस कानून को पहले जैसा ही करने का फैसला लिया और एससी एसटी संशोधन बिल संसद में पेश कर दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया .

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को केंद्र द्वारा संसद में पलटने के बाद इस बार सवर्णों का गुस्सा और विरोध केंद्र की भाजपा सरकार को झेलनी पड़ रही है. सवर्णों का पूरे देश भर में इस कानून के खिलाफ आन्दोलन तेज हो रहा है. सवर्ण भाजपा पर अपनी अवहेलना और दलितों को रिझाने के लिए दलित वोट बैंक की राजनीति का आरोप रहे हैं.

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