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कभी भी शुरू हो सकता है तीसरा विश्व युद्ध,अमेरिका-रूस आमने सामने

इसी महीने के 7 अप्रैल को सीरिया के दौमा क्षेत्र में एक बड़ा हमला हुआ था जिसमें 42 लोग मारे गए थें। पश्चिमी गुट अमेरिका,ब्रिटेन,जर्मनी और फ्रांस का आरोप है की इस हमले में रूस समर्थित सीरिया की सेना ने प्रतिबंधित रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया है।1899 के हेग सम्मेलन और रासायनिक हथियार सम्मेलन(1993) के अंतरराष्ट्रीय कानून के द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ और रासायनिक हथियार निरोधक संगठन(ओपीसीडब्ल्यू) ऐसे किसी भी हमले को अमानवीय और मानवाधिकार के विरूद्ध मानती है।

दरअसल पश्चिमी गुट का यह आरोप उनके सीरिया में कम होते प्रभाव और रूस के बढते प्रभाव के रूप में भी देखा जा सकता है।हालांकि रासायनिक हथियार का प्रयोग मानव सभ्यता के लिए घातक है और ऐसे किसी भी हमले के खिलाफ दुनिया के हर देश और मानवाधिकार संगठन खड़े हो जाते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तो शख्त लहजे में बदला लेने और सीरिया के अंदर हमला करने की बात कही है। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थेरेसा मे और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो ने भी अमेरिका के रूख का समर्थन किया है जिससे स्थिति असामान्य होती दिख रही है।

अगर रूस समर्थित सीरिया के गुट की बात की जाए तो रूस,ईरान,चीन,वोलिविया और काफी हद तक उत्तर कोरिया भी सीरिया के तात्कालिक सरकार के साथ है जिससे वैश्विक शक्ति दो खेंमो मे साफ बँटा दिख रहा है।हालांकि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने किसी भी प्रकार के रासायनिक हथियार के प्रयोग से साफ इंकार किया है लेकिन सोशल मीडिया पर आ रहे तस्वीरों मे हमलें में शिकार हुए लोगो के मुंह से स्पष्ट रूप से झाग निकलते देखा जा सकता है।

वहीं हमले से कुछ दूरी तक के प्रत्यक्षदर्शीयों ने आंखों में भारी जलन की बात कही है जो प्रतिबंधित रासायनिक हथियार के प्रयोग की तरफ ईशारा कर रही है।अमेरिका के एक अधिकारी के अनुसार अमेरिका ने तत्काल स्थिति से निपटने और रूस समर्थित सीरिया के बशर अल असद के सेना को सबक सिखाने के लिए टाॅमहाॅक क्रुज मिसाइल से लदे दो नेवी के युद्धपोत के साथ कई युद्धपोत और जेट को निकट के भूमध्य सागर में तैनात कर रखा है।वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा है की रूस समर्थित सीरिया की सेना ने सीरिया में क्लोरिन गैस जैसे संवेदनशील विध्वंसक गैस का प्रयोग आम नागरिको पर किया है जो अक्षम्य है।

रूस समर्थित सीरिया पर बढ़ते वैश्विक दबाव के मद्देनजर आज रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट रूप से कहा है की अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्ति को धैर्य रखते हुए शांतिपूर्वक बातचीत से रास्ता निकालने की कोशिश की जानी चाहिए।रासायनिक हथियार निरोधक संगठन(ओपीसीडब्ल्यू) का एक दल सीरिया के दौमा में घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंच चुकी है और अगर यह साबित हो जाता है की रूस समर्थित सीरिया की सेना ने रासायनिक हथियारो का प्रयोग किया है,उस स्थिति में अंतरराष्ट्रीय संबंध और बिगङ सकते हैं तथा धैर्य न रखने पर दूनिया तिसरा विश्व युद्ध भी झेल सकती है।

इन सब बिंदुओ के बीच यह तो स्पष्ट है कि दुनिया के बङे देशों के कूटनीतिक लङाइयों के बीच खनीज तेल से संपन्न सीरिया के आमलोग निशाने पर हैं।ध्यान रखने योग्य बात यह है कि जहाँ पश्चिमी देश तेल की कमी और आर्थिक मंदी से उबरने के लिए एक छोटे युद्ध में उतरने की योजना बना सकते हैं वहीं रूस,ईरान और चीन उनके दखल को सीरिया में रोकने के लिए सैनिक ऊतार सकते हैं।यहां बताते चले की प्रथम विश्व युद्ध सिर्फ एक व्यक्ति के हत्या के बाद 1914 में शुरू हुई थी जो बाद में लाखो मानव को निगल चुकी थी।

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