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लोकसभा से निकल राज्यसभा में अटकी ट्रिपल तलाक नाम की 'बीमारी'

पिछले कई महीनों से मुस्लिम महिलाओं के हित के लिए ट्रिपल तलाक को खत्म करने की मुहिम में कुछ एक राजनीतिक दलों को छोड़कर लगभग पूरा देश एक साथ खड़ा था ताकि उन्हें उनका हक मिल सके और वो अपने खिलाफ हो रहे शोषण को रोक सकें । इसीलिए जब इस मामले को कोर्ट में पेश किया गया तो कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि 6 महीने के भीतर इसके खिलाफ शख्त कानून बनाया जाये ताकि मुस्लिम महिलाओं को उनका हक मिल सके और समाज में उनके साथ किसी भी तरह की हो रही दुर्व्यवहार को रोका जा सके ।

पिछले कुछ दिन पहले तक लगभग सभी राजनीतिक दल इस बिल का समर्थन कर रहे थे और यही कारण था कि इस बिल को काफी आसानी से लोक सभा मे पास कर दिया गया जिसमें कांग्रेस जैसी कई पार्टियों ने अपना पूरा समर्थन दिया लेकिन जब इस बिल को राज्य सभा मे पेश किया गया तो वहां यह बिल पास नहीं हो सका ।

राज्य सभा में क्यों फंस गया ट्रिपल तलाक बिल

लोकसभा में सरकार की पूर्ण बहुमत होने के कारण ट्रिपल तलाक बिल को आसानी से पास करा लिया गया लेकिन जब इस बिल को राज्य सभा में पेश किया गया तो कांग्रेस से लेकर तमाम पार्टियों ने ट्रिपल तलाक बिल में संसोधन करने की मांग करने लगी और इस बिल को सलैक्ट कमिटी के पास भेजने की मांग पर अड़ गई ।

आपको बता दें कि राज्य सभा की कुल सीटों की संख्या 245 है जिसमें कांग्रेस और बीजेपी दोनों के पास 57-57 सीटें हैं वहीं समाजवादी पार्टी के पास 18, एआईएडीएमके के पास 13, तृणमूल कांग्रेस के पास 12, तो नॉमिनेट और अन्य के खाते में 81 सीटें हैं और 7 सीटें खाली हैं ।

बीजेपी के पास लोकसभा में तो पूर्ण बहुमत है लेकिन राज्यसभा में वो कांग्रेस की मदद के बगैर कुछ नही कर सकती और कांग्रेस ने यहां अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए इस बिल को सलैक्ट के पास यह कहते हुए भेजने की मांग पर अड़ गई की इसमें जो भी कमियां हैं उन कमियों को सलैक्ट कमिटी दूर करेगी जिस कारण यह बिल राज्यसभा में पास नहीं हो सका और अब इस बिल को अगले 30 जनवरी से सुरु होने वाले बजट सत्र में पेश किया जाएगा ।

क्या होती है सलैक्ट कमिटी

सलैक्ट कमेटी संसदों की एक छोटी से इकाई होती है जिसका काम अटका हुआ बिल या किसी खास बिल को देख कर अपना सुझाव देना या सुधार करना होता है । सलैक्ट कमिटी 2 तरह की होती है पहल स्टैंडिंग कमेटी और दूसरा एडहॉक कमिटी, जिसमे एडहॉक कमिटी भी 2 तरह की होती है पहला सलैक्ट और दूसरा जॉइंट कमिटी और किसी भी बिल में सुधार के लिए सलैक्ट या जॉइंट कमिटी के पास भेजी जाती है । धारा 125 के तहत राज्यसभा का कोई भी सदस्य किसी भी बिल को सलैक्ट या जॉइंट कमिटी के पास भेजने की मांग कर सकती है और जब बिल सलैक्ट कमिटी के पास जैसे जाती है वो एक निर्धारित समय सीमा के भीतर हीं इसमें सुधार कर बिल को पेश करती है ।

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Rahul Tiwari
राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.
http://www.thenationfirst.com

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