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अमेरिका का सीरिया पर हमला,रूस ने मार गिराएं 30 में से 28 मिसाइल

7 अप्रैल को सीरिया के दूमा में रूस समर्थित सीरिया सेना के रासायनिक हमलों के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने सीरिया के अंदर हमले की धमकी दी थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्र को ताजा संबोधन के बाद यह बात स्पष्ट हो चुकी है की अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर सीरिया के अंदर 3 जगह हमला किया है,इन तीनो जगह को राष्ट्रपति के द्वारा रासायनिक हथियार के जखीरा का जगह बताया है जिसे ध्वस्त करना जरूरी था।

हमले में अमेरिका के खतरनाक टाॅमक्रुज मिसाइल को भूमध्यसागर स्थित युद्धपोत से दागा गया वहीं लाल सागर में भी युद्धपोत तैनात की जाने की बात सामने आ रही है। यहाँ बताते चलें की सीरिया के पूर्व के तरफ ये दोनो सागर अवस्थित हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे असभ्य लोगो और देशो के खिलाफ सभ्य लोगो और देशो का हमला करार दिया है।ट्रम्प ने स्पष्ट तौर पर रूस को रासायनिक हमलें के लिए जिम्मेदार बताया जिसमें कई मासूम लोगों की जान चली गई।

ट्रम्प ने आगे बताया की अमेरिका हमेंशा मानवता के साथ खङा रहा है और अमेरिका नहीं चाहता की फिर से विश्व युद्ध हो और करोङो लोग मारे जाएं इसीलिए ऐसे रासायनिक हमलो के खिलाफ दुनिया के सभी सभ्य देशों को खङा होना चाहिए।जाते-जाते उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना किया कि ईश्वर सभी सीरिया के निर्दोष लोगों की रक्षा करें तथा उनकी सम्मान और प्रतिष्ठा उनहें वापस करें।

अमेरिका के रूस समर्थित सीरिया पर हमले के बाद अमेरिका में कार्यरत रूस के राजदूत के ट्वीटर हैंडल से अमेरिका को इस हमले का परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है।वहीं 13 अप्रैल को ही ब्लादिमीर पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक बातचीत किया था जिसे भारत में सीरिया संकट से जोड़कर देखा जा रहा है।

कहीं यह हमला विश्व युद्ध की तरफ न जाए इसके लिए वैश्विक स्तर पर युद्ध और हमलों के अलावे कोई वैकल्पिक रास्ता खोजने की सुगबुगाहट नही दिख रही है शायद संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद इसपर कोई ठोस निर्णय ले लेकिन यहाँ यह ध्यान रखा जाना चाहिए की सीरिया के हमलों में शामिल तीनो देश अमेरिका-ब्रिटेन-फ्रांस को सुरक्षा परिषद मे वीटो पाॅवर मिला हुआ है अतः मामला लंबा खींच सकता है।

पश्चिम देशों का गुट रूस समर्थित सीरिया के बशर-अल-असद सरकार के खिलाफ ही रही है।ज्यादातर अमेरिकन लाॅबी के पश्चिमी देश रूस को मध्य-पूर्व में रोकना चाहते हैं और यह हमला रूस पर मानसिक रूप से विजय हासिल करने के कदम की तरफ भी देखा जा सकता है।खैर,रूस के तरफ से सरकारी वक्तव्य आना अभी बाकि है,बताते चलें की रूस के समर्थित सीरिया सरकार के साथ ईरान,चीन और बोलिविया भी शामिल है तथा भारत अभी तटस्थ भी भूमिका में है।जाते-जाते बताते चले की रूस समर्थित सीरिया की सेना ने 30 मिसाइल में से 28 मिसाइल को मार गिराने का दावा किया है।

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