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क्यों नहीं जा सकती महिलाएं सबरीमाला मंदिर के अंदर, क्या है इसका इतिहास ?

28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को जाने की अनुमति दे दी । मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को गलत ठहराते हुए कोर्ट ने कहा था कि हर आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने का अधिकार है । मतलब कोर्ट के अनुसार वो महिलाएं भी इस मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं जिन्हें रजस्वला (मासिक धर्म) आते हैं । हालाकि केरल सरकार पहले ही मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में थी लेकिन अब मंदिर की देख-रेख कर रहे श्रवणकोर देवस्म बोर्ड सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहा है ।

कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस ने बुधवार को दो महिलाओं अम्मिनी बिंदु और कनक दुर्गा को भगवान अययप्पा के दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश करा दिया जिसके बाद पुजारियों ने ये कहते हुए मंदिर की शुद्धिकरण की कि अब मंदिर अशुद्ध हो गया । इस प्रवेश के बाद पुरे केरल में देखते ही देखते दंगा भड़क गया जिसमें कई लोगों की जान भी चली गई ।

क्या है इतिहास ?

भगवान अयप्पा

कहा जाता है कि भगवान अयप्पा भगवान विष्णु और शिव के पुत्र है । भगवान विष्णु उस समय मोहनी नामक स्त्री के रूप में अवतरित थे । इसी लिए उन्हें हरिहर पुत्र भी कहा जाता है हरि का अर्थ होता है विष्णु और हर का संबंध शिव से बताया जाता है । भगवान अयप्पा को कई अन्य नाम अयप्पन, शास्ता और मणिकांत आदि नामों से बुलाया जाता है । पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान अयप्पा ब्रमचारी थे । यही कारण है कि इस मंदिर में 10 साल से ले कर 50 साल तक कि महिलाओं का प्रवेश वर्जित किया गया है ।

कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा राजशेखेरा ने करवाया था । उन्हें भगवान अयप्पा बाल रूप में पाम्पा नदी के किनारे मिले थे । जब भगवान अयप्पा बड़े हुए तो राजा अपना राज्य उन्हें सौपना चाहते थे लेकिन रानी इसके लिए तैयार नहीं थी । एक बार रानी ने बीमार होने का बहाना कर भगवान अयप्पा से बोलीं की उनकी बीमारी शेरनी के दूध से ही ठीक हो सकता है । तो भगवान अयप्पा शेरनी का दूध लेने जंगल गए जहां उनकी मुलाकात एक राक्षसी से होती है जिसे उन्होंने मार दिया ।

ये देख भगवान इंद्र खुश हुए और शेरनी को उनके साथ भेज दिए । इसके बाद राजा उन्हें राज्य सौपना चाहते थे लेकिन भगवान अयप्पा ने मना कर दिए और वहां से विलुप्त हो गए । धीरे धीरे राजा की तबियत खराब होने लगी तब भगवान अयप्पा ने दर्शन दिए और अपने नाम से मंदिर बनाने को कहा । जिसके बाद राजा ने भगवान अयप्पा का भव्य मंदिर बनवाया । इस मंदिर का निर्माण आज से 800 साल पहले किया गया था ।

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Rahul Tiwari
युवा पत्रकार
http://www.thenationfirst.com

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