विचार

एक कड़वा सत्य देश के नाम

मारा देश भारत तो 15 अगस्त 1947 को ही फिरंगियों से आज़ाद हो गया था लेकिन हम मासूम जनता को क्या पता था की "घर का भेदी लंका ढहाऐ " वाली कहावत हम लोगो पर भी दोहराई जा सकती है | एक ओर जहाँ हम 15 अगस्त यानी भारत की आज़ादी की खुशियाँ मनाते है तिरंगे को शान से फहराते है, तोपों की सलामी देते है और भारत माता की जय बोल कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते है वही दूसरी ओर तिरंगे को जलाया जाता है सैनिकों पर पत्थर बरसाये जाते है और गे इन्शा-अल्लाह इन्शा-अल्लाह और न जाने क्या -क्या नारे लगाये जाते है |

लेकिन मजाल की देश के सत्ता -आशिन कुछ कर जाएँ इन आस्तीन के सांपो पर अगर सही कहा जाए तो आज हमारा देश पूरी तरह से आतंकवाद , उग्रवाद , नक्सलवाद और सबके पितामाह नेतावाद (राजनीति ) में सुलग रहा है |आप सोच रहे होंगे की मैं ये क्या बोल रहा हूँ ? लेकिन ये सत्य है आए दिन देश में ऐसी -ऐसी घटना घट जाती है जिस से आप अनभिग नहीं होंगे |हरियाणा की ही एक घटना को ले लीजिये जिसमे एक लड़की से तीन साल पहले रेप किया जाता है और फिर तीन साल बाद उसी लड़की से वही रेपिस्ट रेप करता है कितनी दुखद और अविस्वास्निय घटना है !

हरियाणा ही क्यों आप भारत के किसी भी राज्य को ले लीजिये जहाँ आए दिन भयावह और दिल को दहला देने वाली घटना न घटती हों ! क्या हमारे देश में शासन नहीं है , प्रशासन नहीं है , कानून नहीं है ? सब कुछ है तो क्यों घटती हैं घटना ?

क्योकि इस के पीछे भी कारण है आज - कल सभी बिकाऊ हो गये है आप कितना भी जघन्य अपराध कर के क्यों न आये हो टेबल के नीचे से प्रसाद बढ़ा दीजिये और घर पे मज़े लिजिए | इसे छोड़िये ये तो अब आम बात हो गई है लेकिन अब तो सीधे जड़ पे ही वार किया जाता है जिसे देश का भविष्य कहा जाता है अब तो उसे भी नहीं छोड़ा जाता उसकी जिन्दगी से भी खिलवाड़ किया जाने लगा हैं |

आज एक ओर शिक्षा और एक ओर इस शिक्षा को पाकर देश को उन्नती की राह पर ले जाने वाले दोनों का संबंध-विच्छेद किया जा रहा है वह भी उनके हाथों जिसे हमारे यहाँ भगवान् से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है अगर कुम्हार घड़ा बनाने में ही छल करना शुरु कर दे , तो क्या कुम्हार द्वारा बनाए गए घड़े से हम काम ले सकते है नहीं ना ! आज बिहार की घटना को लीजिये जिस छात्रा को पोलिटिकल साइंस की स्पेलिंग नहीं आती उसे बिहार का टॉपर बना दिया जाता है यानी अब शिक्षा भी पैसों की मोहताज़ हो गया |

जहाँ एक ओर ( RTE ) राईट टू एजुकेशन है वही शिक्षा माफ़िया इस की आड़ में अपना महल खड़ा कर रहें है शिक्षा के नाम पर बड़े -बड़े ट्रस्ट और NGO खोले जाते है और ज़ाकिर नाइक , आरएसएस , ओवैसी जैसे लोग अनाप -सनाप बोल के कचरमबद्ध करवाने पे तुले हुए होते हैं |

मैं कहता हूँ क्यो हो रहे है ये सब क्योंकि जब बाप ही गलत काम करे तो बेटे ने किया तो क्या हुआ? यही बात हमारे देश पे लागु होती है क्योंकि यहाँ तो नेता ही भ्रष्ट हैं इन नेतओं का कहर तो डेंगू से भी भयावह होती है डेंगू तो उपचार करने पर ख़त्म हो जातें है लेकिन राजनेताओ का कहर तो ऐसा बरपता है कि लोग न तो जीवित होतें हैं और न ही मृत मानो जीता -जागता , चलता -फिरता , बोलता -बैठता , कठपुतली हो जो नेताओं द्वारा नचाया जाता हो |

ये नेता रूपी कचरा जहाँ देखो वही मुंह मारने के फ़िराक में होता है न जाने कौन -कौन से घोटाले कर लेते हैं | चारा -घोटाला , 2G स्पेक्ट्रम -घोटाला , DCC - घोटाला , आय से अधिक संपत्ति रखने वाले भ्रष्टाचार रूपी बीमारी से पीड़ित है ये नेता जिसका कोई इलाज ही नहीं है डॉक्टर के पास | दुर्भाग्यवश अगर इलाज किया भी जाता है तो बीमारी और बढ़ जाती है |

चिंता का विषय ये है कि ये बीमारी दिन-प्रतिदिन बढ़ ही रही है जिसका इलाज सीबीआई , एनआईए और रॉ जैसे जाँच दलों से करवाया जाता है लेकिन इसमे भी कुछ भ्रष्ट डॉक्टर होते है जिसके कारण सही रोगी का पता ही नहीं चल पाता और जो रोगी नहीं है उसका इलाज कर दिया जाता है फिर जो असली रोगी है उसकी बीमारी इतनी भयानक रूप ले लेती है की सभी इस बीमारी की चपेट में आने लगते है और फिर शुरु हो जाता है देश में भ्रष्टाचार , आतंकवाद , नक्सलवाद , उग्रवाद , भूखमरी , बेरोजगारी और न जाने क्या - क्या ?

अगर इन सब से हम छुटकारा पाना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें इन नेताओ की चाल को समझना होगा |जो अपने स्वार्थ के लिए जनता को बहलाने का काम करते हैं और सत्ता-सीन होकर इन बीमारी को बढ़ावा देते है |

हमें इन दलदल को ख़त्म करना होगा जो स्व-स्वार्थ के लिए जब मन हो एक नया दल बना लेते है और वादे पे वादे करते है अतः हमारे देश के नेता अगर निःस्वार्थ भाव से काम करें और लोकतंत्र की परिभाषा (जनता का जनता के लिए और जनता के द्वारा की गई शासन प्रणाली ) को फॉलो करें तो हमारा देश फिर से सोने की चिड़ियाँ और विश्व गुरु कहलाने लगेगी |

 जय हिन्द जय भारत

Article:- Pushpam Savarn

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