Valentine Special: प्यार का सही मतलब नहीं समझते, वैलेंटाइन का हॉव्वा बनाते हैं
विचार

Valentine Special: प्यार का सही मतलब नहीं समझते, वैलेंटाइन का हॉव्वा बनाते हैं

जहाँ युवा हैं, वहाँ वैलेंटाइन है। ऐसा इसलिए नहीं कि आजकल के युवा पश्चिम संस्कृति की तरफ ज्यादा झुके हैं। बल्कि इसलिए क्योंकि हमारी संस्कृति में प्यार के लिए किसी विशेष दिन को नहीं चुना गया है। हमारे समाज की रूढ़िवादी सोंच है जो प्यार करनें वाले जोड़ों को पसंद नहीं करता है। प्यार ना जाति देखता है और ना हीं धर्म,रंग या क्षेत्र का बंधन। और जहां का समाज अभी भी जाति धर्म का भेदभाव रखता है वह आखिर इसको कैसे स्वीकार कर सकता है।

हकीकत जानना है तो उन प्रेमी जोड़ों से पूछिए जो अलग अलग जाति या धर्म के है। यहाँ तक कि अगर एक लड़की अपनें जाति के हीं लड़के से प्यार और उससे शादी करनें की इच्छा जताए तो उसके साथ ऐसा व्यवहार होता है मानों उसनें अलकायदा ज्वाईन करनें की बात कर दी हो। मजबूरन भागकर शादी करना पड़ता है। ऐसी किसी भी परिस्थिति में उनका परिवार उन्हें स्वीकार नहीं करता। शायद इसका डर की समाज में लोग क्या कहेंगे। यही वह डर है जिसने चरस बो रखा है। आज कोई अपनी मर्ज़ी से प्यार करके घर संसार बसाने की पहल तो करे, ऑनर किलिंग जैसे कांड आ जाते हैं। और जो डर के परिवार के दबाव में शादी करते हैं वो ज़िन्दगी भर पछताते हैं। तब कोई भी समाज उनका साथ देने नहीं आता। तब परिवार की इज्ज़त नीलाम नहीं होती है।

एक पक्ष यह भी है कि अगर आपका प्यार सच्चा है तो आपके लिए सालों भर वेलेंटाइन डे है। प्यार दिखाने के लिए एक हीं दिन क्यों?
और हां, जरूरी नहीं कि प्यार हमेशा लड़का लड़की के बीच हीं हो। मां पिता का अपने संतान से प्यार, दोस्तों के प्यार, सगे संबंधियों का प्यार क्या प्यार नहीं है? हम प्यार शब्द सुनते ही 'फ्री फायर' करने लगते हैं। हमारे मन में तरह तरह के विकृत विचार आने लगते हैं।

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वैलेंटाइन डे मनाने की वास्तविक कहानी अभी भी उतनी स्पष्ट नहीं है। लेकिन सबसे दमदार बात यह है कि रोम के एक संत थें 'वैलेंटाइन'.जिन्हें ईसाई होने की वजह से रोम के राजा द्वारा प्रताड़ित किया गया था। रोम के सम्राट क्लोडियस 2 उनसे प्रभावित थे और चाहते थे कि वह धर्मांतरण कर लें। लेकिन वैलेंटाइन चाहते थे कि सम्राट ईसाई बन जाएं। इसी कारण उन्हें मार दिया गया। जब वैलेंटाइन जेल में बंद थे तो उन्होंने जेलर की अंधी बेटी को ठीक कर दिया था, जिसके बाद दोनों में प्यार हो गया। मरते वक्त वैलेंटाइन नें अपनी प्रेमिका के लिए लिखा 'योर वैलेंटाइन' मतलब तुम्हारा वैलेंटाइन। हालांकि यह दंत कथा है लेकिन सबसे सटीक तर्क यही लगता है।

जिस चीज को आप बहुत ज्यादा चाहते हैं, जिसके बिना आप रह नहीं सकते हैं,वही तो प्यार है। कोई क्रिकेट खेलता है तो उसका प्यार क्रिकेट है। किसी को वाइन से प्यार है तो किसी को म्यूजिक से। आपको किसी नें यह अधिकार नहीं दिया है कि आप किसी को प्यार करनें से रोको।

पिछले दो तीन सालों में यह देखने को मिला है कि 14 फरवरी को बजरंग दल सहित कई संगठन सक्रिय हो जाते हैं। प्रेमी जोड़ों की पिटाई की जाती है। उनका तर्क होता है कि यह हम अपनी संस्कृति को बचाने के लिए कर रहे होते हैं। जबकि हकीकत बिल्कुल उलट है। वे ऐसे लोग होते हैं जो या तो प्यार को हवस समझने की गलती कर अपना प्यार खो चुके होते हैं या उन्हें कभी किसी से सच्चा प्यार हुआ हीं नहीं होता। वे जब शराब पीकर रास्ते में नौटंकी करते हैं तब उनके जेहन में संस्कृति और सभ्यता की बात नहीं आती।

हां जब यही प्यार सार्वजनिक अश्लीलता में बदल जाए तो ऐक्शन लिए जाना चाहिए। लेकिन इसका भी अधिकार आमलोगों को ना होकर प्रशासन को है। इसके साथ जो हग डे, किस डे, प्रोमिस डे जैसे कुछ और दिन है, वह मानवीय दिमाग की एक उपज है। इससे भी बड़ी बात कि यह मार्केट माइंड लोगों का किया धड़ा है।

जीवन जीने का अधिकार सभी को है। और वह किसके साथ जीना चाहे यह उसके ऊपर छोड़ देना चाहिए। हमें उनकी मदद करनी चाहिए ना कि उनपर लाठी डंडे बरसाना चाहिए। हम प्यार करने वालों का समर्थन क्यों नहीं कर सकते? उनका गुनाह क्या होता है?। प्यार चाहे कोई भी करे, लड़की- लड़का आपस में करें या कोई अपनें प्रोफेशन से करे या माता-पिता, दोस्त से। हमें उनका सहयोग करना चाहिए ताकि सब खुश रहें और अपना जीवन सही से गुजारें।

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