bharat bandh on 6th september sc-st act | सवर्ण का भारत बंद
विचार

बीजेपी ये ना भूले... जो सत्ता में बिठाना जानता है वो सत्ता से बेदखल करना भी जानता है

एक कहावत है जो जन्म देना जानता है वो मिटाना भी जानता है । आज बीजेपी की सत्ता भारत के 21 राज्यों में है और इस सत्ता को दिलाने में सबसे ज़्यादा योगदान सवर्णों का है लेकिन बीजेपी उनके मांग को ही अनदेखा कर रही है जिस कारण आज सवर्णों ने भारत बंद का आवाहन किया ।

बीजेपी ये बखूबी जानती है की अगर वो सत्ता पर काबिज है तो वो सवर्णों के बदौलत ही हैं फिर भी उनके विरोध में फैसले ले रही है ऐसे में 2019 का चुनाव जीतना बीजेपी के लिए दूर का कौड़ी बन सकता है अर्थात वो भूल रहे हैं कि जिसने उन्हें सत्ता पर काबिज किया है वही इस सत्ता से उन्हें बेदखल भी कर सकते हैं ।

मुझे लगता है सवर्णों के मांग को अनसुनी करने के पीछे एक ही कारण है वह यह कि बीजेपी ये सोंचती है कि आखिर सवर्ण जाएंगे कहाँ उनके पास विकल्प ही क्या है वो कांग्रेस को तो वोट करेंगे नही तो अंत मे बीजेपी को ही उन्हें वोट करना होगा । इसीलिए वो SC-ST को लुभाने के लिए कोई भी फैसला बदलने को तैयार हैं जो SC-ST के हक में नहीं है जिसका जीता जागता उदाहरण है SC-ST एक्ट में कोर्ट द्वारा किये गए बदलावों को एक ही झटके में बदल देना क्योंकि इसमें बीजेपी को अपना वोट बैंक बनता दिख रहा है ।

लेकिन शायद बीजेपी ये भूल रही की EVM मशीन में किसी पार्टी के समर्थन करने वाले चिन्ह के अलावे नोटा का भी ऑप्शन होता है जिसे सवर्ण अपना हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं और बीजेपी को उनकी जगह दिखा सकते हैं ।

सवर्ण क्यों हैं SC-ST के विरोध में ?

आज यानी की 6 सिंतबर को सवर्णों ने भारत बंद का आवाहन किया है जिस कारण 10 राज्यों में धारा 144 लगा दी गई है और यह एक्ट अगले दिन यानी 7 सितंबर को भी लागू रहेगी । दरअसल सवर्णों को लगता हैं कि इस एक्ट को मूल रूप में लाकर बीजेपी ने गलत किया है इसके मूल रूप में आ जाने से SC-ST इस एक्ट का गलत इस्तेमाल करके उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं इसलिए सवर्णों की मांग है कि SC-ST एक्ट में जो सुप्रीम कोर्ट ने बदलाव किया है उसे ज्यों का त्यों ही रहने दे यानी सरकार एक्ट के पुराने रूप को ही बहाल करें ।

क्या है SC-ST एक्ट ?

अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए 1989 सरकार में SC-ST एक्ट को पारित की थी । इस एक्ट को जम्मू कश्मीर को छोड़ कर पूरे भारत में लागू किया और इस एक्ट के तहत इन्हें समाज मे बराबर का हक़ दिलाने का हर संभव प्रयास किया गया इनके मदद के लिए जरूरी उपाय किये गए ।

इन पर होने वाली अत्याचारों को रोकने के लिए विशेष प्रबंध किया 1989 में पारित किया गया SC-ST एक्ट के मुताबिक अगर किसी को इसके लिए दोषी बताया जा रहा हो तो उसकी गिरफ्तारी तुरंत की जाएगी बगैर किसी जांच के इसके अलावे आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं दी जाएजी आरोपी को हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिल सकेगी और इस मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी ही करेंगे ।

जाति सूचक शब्द के इस्तेमाल पर तुरंत गिरफ्तारी होगी जिसकी सुनवाई स्पेशल कोर्ट में ही होगी । सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल करने से पहले जांच एजेंसी को ऑथोरिटी से इजाजत नही लेनी पड़ेगी । लेकिन पिछ्ले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट में थोड़े बहुत बदलाव किया थे जिसके बाद पिछड़े वर्गों ने भारत बंद का आवाहन भी किया था।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा किया गया बदलाव

सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST एक्ट में कुछ छोटे बदलाव करते हुए कहा था कि इस मामले में होने वाली गिरफ्तारी तुरंत नहीं की जाएगी अगर शिकायत मिलती है तो रिपोर्ट दर्ज करने से पहले उसकी जांच हो फिर FIR दर्ज किया जाए । कोर्ट ने कहा कि अगर शिकायत मिलती है तो इसकी शुरुआती जांच DSP अस्तर की होगी और जांच किसी भी सूरत में 7 दिन से ज़्यादा नहीं होना चाहिए ।

DSP इसकी शुरुआती जांच कर नतीजा निकलेंगे की शिकायत के मुताबिक क्या कोई मामला बनता है या नहीं या फिर इस एक्ट का फायदा उठा कर निर्दोषों को फंसाने की कोशिश की जा रही है । सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि इस एक्ट का इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा रहा है इस लिए इस मामले में सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत ले सकते हैं । लेकिन इस एक्ट को अपने मूल रूप में लाने के लिए एक्ट 18A को जोड़ा जाएगा जिसके जरिये सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया गया बदलाव रद्द हो जाएगी ।

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