सवर्णों पर लाठीचार्ज: नितीश बाबू, आपके सुशासन पर शर्म आ रही है
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सवर्णों पर लाठीचार्ज: नितीश बाबू, आपके सुशासन पर शर्म आ रही है

बिहार के किसी भी जिले का कोई भी समाचार पत्र उठा लिजिए. शुरू से लेकर बीच के पन्नों तक में कई मर्डर और लूटपाट की घटनाएँ हल्की नजर में भी देखनें को मिल जायेंगी. यह एक दिन की नहीं, रोज रोज की बात है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार अपनें आप को सुशासन बाबू का तमगा देनें में तनिक भी शर्म और संकोच नहीं करते. जब सुशासन में मर्डर, अपहरण और लूटपाट की घटनाएँ हो सकती हैं तो सोंचिए कुशासन में क्या होता होगा. मतलब साफ है बिहार में कानून के रखवाले अपनें हाथ खड़े कर चुके हैं. लेकिन उन्हें नौकरी बचाए रखनें के लिए कुछ तो करना होगा न, बस फिर क्या बिना हथियार के निहत्थे, मासूम लोगों की भीड़ पर हीं अपना तांडव मचा देते हैं. आइए आपको बताते हैं आखिर मामला क्या है.

21 सितंबर को पूरे राज्य के सवर्णों ने भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के नेतृत्व में पटना के गाँधी मैदान में इकठ्ठा हुए. भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं गया के मूल निवासी आशुतोष कुमार, जिनके लीडरशिप में प्रदर्शन हो रहा था. SC-ST एक्ट के विरोध में कुछ और माँगों को लेकर सवर्णों नें अपने एकता का परिचय दिया. प्लान था मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना, बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से. गाँधी मैदान से हजारों की भीड़ हाथ में बैनर-पोस्टर लिए सीएम आवास की तरफ निकल गई, मीडियाकर्मी और पुलिस भी साथ साथ थें.

पटना पुलिस नें मौर्यलोक के पास बैरिकेडिंग लगा दी जिससे कार्यकर्ता आगे नहीं बढ़ पाए. लेकिन भीड़ बैरिकेडिंग तोड़ती हुई शांति के साथ आगे बढ़ गई. इस बार डाकबंगला चौराहे पर भारी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों नें फिर से रोकनें की कोशिश की. कार्यकर्ताओं के जोश के आगे जब पुलिस की एक न चली तो उनपर लाठीचार्ज कर दिया गया. निर्दोष, मासूम लोगों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया. किसी का सिर फटा, तो किसी हाथ टूटा.

sc-st एक्ट के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवक का पुलिस लाठीचार्ज में सर फूट गया
Sc-St एक्ट के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवक का पुलिस लाठीचार्ज में सर फट गया

चारो तरफ खून से सने कपड़े नजर आ रहे थे. एकदम शांतिपूर्वक चल रही भीड़ पर बर्बर पुलिसिया कार्रवाई से माहौल गरमा गया. पुलिस नें आशुतोष को अरेस्ट कर लिया, हालांकि बाद में छोड़ दिया गया. सवर्ण एकता मंच के साथ कदम में कदम मिलाकर चल रहे लोगों की गलती बस इतनी थी कि वे अपनें राज्य के मुखिया से 'न्याय' की गुहार लगानें जा रहे थे. लेकिन हुआ इसके उल्टा.

इनकी माँगे क्या है, ये भी हम बताते हैं. पहली माँग है कि गरीब सवर्णों को भी आरक्षण मिले ताकि वे आगे बढ़ सकें, दूसरी माँग थी, 6 सितंबर के सवर्णों के भारत बंद में गिरफ्तार हुए लोगों को रिहा किया जाए और तीसरी माँग, 10 सितंबर के भारत बंद में महिलाओं से हुए दुर्व्यवहार की जाँच कर कार्रवाई की जाए. इन तीनों माँगों में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसनें बिहार सरकार को यह आदेश देनें के लिए मजबूर किया कि लाठी डंडो से सबकी पिटाई कर दो. गाँव से लेकर शहर तक एक कहावत है 'विनाश काले विपरीत बुद्धि'. यानि जब विनाश का समय आता है, तो बुद्धि उल्टी हो हीं जाती है.

भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशुतोष कुमार नें फेसबुक लाइव के द्वारा समर्थकों से कहा कि "कल पुलिस अधिकारियों नें यह कहकर रोकनें की कोशिश की, कि यह प्रोटोकॉल है जिसके तहत आप सीएम आवास तक नहीं जा सकते. आखिर अपनें मुखिया से अपना अधिकार माँगनें में कैसा प्रोटोकॉल?. कल नितीश कुमार के चेहरे पर जिस तरह पसीना था वह आजतक नहीं देखा गया था. कल के प्रदर्शन से नितीश जी को सवर्णों की क्षमता का अंदाजा हो गया है". साथ हीं उन्होनें भूमिहार समाज के सबसे बड़े नेता बरमेश्वर मुखिया की हत्या में भी नितीश कुमार का हाथ बताया है. उन्होनें यह भी कहा कि नितीश कुमार नें अपनें फायदे के लिए भूमिहारों का केवल यूज किया है.

राज्य में कानून का राज लानें में नाकाम सरकार की नाकामी दिन पर दिन उजागर होती जा रही है. 10 सितंबर को जब राजद और जाप कार्यकर्ताओं नें हाथ में लाठी डंडे और पत्थर लेकर तोड़फोड़ की थी, तब ना तो सुशासन बाबू की पुलिस नजर आ रही थी और ना हीं वे खुद. वे उनपर बल प्रयोग कैसे कर सकते थे, आखिर राजनीति के खेल में पिछड़ जाते न, उनसे वोट मिलनें वाला होता है. लेकिन जिनके पास न लाठी है न डंडे हैं तो केवल पोस्टर और बैनर, उसे मारने में बिहार पुलिस अपनी बहादुरी समझती है.

गंभीर बात यह है कि लाठीचार्ज से पहले आंसू गैस के गोले, और वाटर कैनन का यूज किया जाता है लेकिन बिहार पुलिस नें सबसे आखिरी रास्ते को हीं पहले क्यों चुना? आखिर कौन कौन से अधिकारी इन्हें गाइड कर रहे थे?. क्या आशुतोष के इन बातों में भी दम है कि सरकार लाठीचार्ज क्या, गोली भी चलवा सकती थी. बड़े प्रशासनिक स्तर पर बहुत बड़ी चूक हुई तो जवाब तो देना पड़ेगा. न केवल जवाब, बल्कि जिस तरह से सवर्ण, बिहार की राजनीति के सबसे मुख्य भूमिका में होते हैं , 2019 में नितीश कुमार के 'सुशासन' का खटिया खड़ा होना तय है. बिहार की जनता कह रही है 'नीतिश बाबू, आपके सुशासन पर अब शर्म आ रही है'.

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