कविता

तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी लिखता हूँ

तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी लिखता हूँ  । प्यार के अल्फाज़ो से सजाए मैं तेरी नादानी लिखता हूँ, तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी लिखता हूँ । लाखों अरमा हैं तेरे दिल में उस अरमा को मैं अपनी जुबानी लिखता हूँ , तेरी रूह में उतर कर मैं एक कहानी […]

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कविता

दोस्त

वो दोस्ती एक हसीन किस्सा था जो वक़्त के साथ गुज़रता गया , बचपन की यादों को छोड़ वो सपनो के पीछे उड़ता गया, लड़ता है आज वो खुद से जो कभी हमारे लिए लड़ता रहा । जिम्मेदारी के बोझ तले ऐसे  दबा वो और फिर व्यस्त हुआ दुनियादरी में, मांज रहा पीतल की तरह कोई किस्मत […]

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कविता

तुम बहुत हसीन हो ऐ कविता

तुम बहुत हसीन हो ऐ कविता जो जज्बातों को जगती हो । वर्षों से धूमिल पड़ी यादों को शब्दो में सजाती हो, कभी संजोती तुम उन हसीन लम्हों को, कभी सजाती तुम उन नमकीन लम्हों को, याद दिला कर वादों का उनका एहसास दिलाती हो, तुम बहुत हसीन हो ऐ कविता जो जज्बातों को जागती […]

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कविता

मेरी आरजू

एक आरजू थी ऐ ज़िंदगी कस कर गले लगता तुझे, मुझे मालूम है तू मुझसे खफा है, फिरभी अपना होने का एहसास दिलाता तुझे, ऐ ज़िंदगी कसकर गले लगता तुझे । हर वक़्त तू मेरे साथ और मैं तेरे साथ रहूं, तेरी ही आगोस में मैं सोता हूँ, शायद इसका एहसास दिलाता तुझे, ऐ ज़िंदगी […]

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कविता

आ ज़िंदगी जी लूँ तुझे

यह भी पढ़ें : तुम भी तन्हा मैं भी तन्हा आ ज़िंदगी जी लूँ तुझे, कब से फरियाद कर रहा था तू कभी तो टटोल मेरे मन को मैं ही तो तेरा आपना हूँ तेरे उज्ज्वल भविष्य का एक मात्र सपना  हूँ । बुझे हुए दीपक को जला कर कर रोशनी खुद में पीछे छोर दे […]

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कविता

की मैं तेरा हूँ

निकाल दो ये ख्याल अपने दिल से की मैं तेरा हूँ दूर जा चुका हूँ मैं तुमसे तू जा ढूंढ ले किसी और को तू बीते हुए कल की सवेरा थी और मैं आने वाला कल का सवेरा हूँ । आपत्ति मुझे कोई नहीं यही तो तेरा पेसा है आज मेरे इश्क़ की गला घोटी […]

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कविता

एक बूंद गिरा जो रक्त का

एक बूंद गिरा जो रक्त का लाल हुआ ये अम्बर छलक पड़ा आंखों से आंसू देख भयावह मंजर जंज़ीरों में जकड़ी थी वो हुआ मलाल उसका अपनी आहुति देने को खड़ा था लाल उसका बेदी सजी थी वीरों की मिट्टी की तिलक लगा कर बजे नगाड़े मैदां में युद्ध का भीषण हुंकार हुआ वक़्त की […]

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कविता

भारत माँ के बेटे हैं हम जो रहता गंगा घाट है

भारत माँ के बेटे हैं हम जो रहता गंगा घाट है  दरिया सा बहता हूं मैं समंदर सा आतुर हूँ वक़्त की कीमत को पहचानूँ इसीलिए मगरूर हूँ सूर्य की किरणों सा चमकता मेरा ललाट है भारत माँ के बेटे हैं, हम जो रहता गंगा घाट है शीतलता चंद्रमा से मिली प्रण लेने की शक्ति, अपने देवों से […]

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कविता

आबरु

तेरी करुण कंद्रण से दिल मेरा भी रोया था, आंसू रक्त के माफिक उस वक्त जब तेरे आंखों से बहा था, जब तेरी आबरु तार तार हुआ एक आग लगी थी उस वक्त मेरे दिल मे भी, और मैं जार जार रोया था । दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं जब उन दरिंकदो […]

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कविता

फरेबी

धुंध.. पर गई यादों पे खामोश हो गई वो अपने हीं वादों पे, जब दामन थाम दूसरे की निकली वो शक हुआ था मुझे उसके इरादों पे, शक्ल मासूम था दिल मे लिये थी खंजर नज़रें थीं झुकी हुई मेरे सपनों को तोड़ रही थी वो काफी भयावह था वो मंजर, फरेब मानों रियासत में […]

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