कविता

आ ज़िंदगी जी लूँ तुझे

यह भी पढ़ें : तुम भी तन्हा मैं भी तन्हा

आ ज़िंदगी जी लूँ तुझे,

कब से फरियाद कर रहा था तू

कभी तो टटोल मेरे मन को

मैं ही तो तेरा आपना हूँ

तेरे उज्ज्वल भविष्य का

एक मात्र सपना  हूँ ।

बुझे हुए दीपक को जला कर

कर रोशनी खुद में

पीछे छोर दे

मोह के जंजालों को

विलीन कर खुद को मुझमें

पग पग पर साथ चलूंगा

मैं हीं तो तेरे ।

हां,अब ज़रूरत मुझे भी है ज़िंदगी

तेरे साथ होने की

कब से दरकिनार कर बैठ हूँ

तेरी आरजुओं को

अब तम्मना है मेरी

हस कर गले लगाऊं तुझे

कुछ चुरा लूँ तुझसे

तेरे ही लम्हे को

इतना तो हक़ है हीं मुझे,

आ ज़िंदगी जी लूँ तुझे।

 

1,684 total views, 2 views today

Facebook Comments

Leave a Reply