कविता

क्योंकि आज मैं तेरी हिरासत में हूँ

लो कर लो अपनी हसरतें पूरी
क्योंकि आज मैं तेरी हिरासत में हूँ ।

जितनी भी शिकायतें हैं तुम्हारी
दूर कर लो आज उन्हें
शायद कल मिज़ाज तल्ख हो जाये,
फिर फरियाद करती फ़िरोगी
मौका है दस्तूर है
क्योंकि आज मैं तेरी हिरासत में हूँ ।

मुमकिन नही कल सुनु मैं तुझे
कर लो फरियाद आज हीं
अपने अंदर की विरह-वेदना को
प्रकट कर डालो तत्काल हीं
क्योंकि आज मैं तेरी हिरासत में हूँ ।

मेरा क्या भरोसा
अभी हूँ कल शायद ना रहूं
फिर कौन समझेगा दर्द को तुम्हारे
दर्द गहरा ना हो जाये इससे पहले,
चलो बात दो तुम मुझे, मौका है
आज मैं तेरी हिरासत में हूँ ।

जितनी गुनाह करना है कर डालो
कल शायद फिर मैं तंग आ जाउं
चुरा लो मुझसे ही मेरे लम्हें को
क्योंकि आज मैं तेरी हिरासत में हूँ ।

लो कर लो अपनी हसरतें पूरी
आज मैं तेरी हिरासत में हूँ ।

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