कविता

जलता रहा मैं रात भर

जलता रहा मैं रात भर
धु धु कर जलता रहा मैं रात भर
तप रही थी तुम भी तो उस आग में
तुम ने लगाई थी एक चिंगारी
धीरे धीरे जला आशियाँ मेरा
तेरी आंखों के शराब में
डूब हुआ था मैं उस रात
धु धु कर जल रहा था
आसियां मेरा जिस रात
दिल पसिझता रहा उस आग में
और हम उलझे जा रहे थे
तुम्हारे अल्फाज़ो के जज्बात में
लगा यही तो हसीं ख्वाब है
और जल रहे थे हसीं अरमान मेरे
तुम भी ही तो थी उस हसीं ख्वाब में
धु धु कर जलता रहा मैं रात भर
तप रही थी तुम भी तो उस आग में
Facebook Comments
Rahul Tiwari
राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.
http://www.thenationfirst.com

Leave a Reply