कविता

चलो खुद को बर्बाद करते हैं

चलो अपने बीते हुए पलों को याद करते हैं
पहले तो इश्क़ था दोनों को एक दूसरे से
लेकिन आज केवल तन्हाई है
नदी की तरह समंदर में मिलकर
खुद को बर्बाद करते हैं
चलो अपने बीते हुए पलों को याद करते हैं ।
कुछ शिकायते तुझे भी होंगी
कुछ शिकायतें मुझे भी हैं
तसल्ली से रख दो अपने दिल की बात
तसल्ली से रखता मैं भी हूँ
शायद दूर हों जाएं
शिकायतें दोनों की एक दूसरे से
चलो उलझे हुए जज्बातों को याद करते हैं
कभी इश्क़ हमारा मुकम्मल  हुआ करता था
आज कोसते दोनों एक दूसरे को हैं
कभी तरपते थे दोनों इश्क़ में
चलो अपने प्यार मासूमियत को याद करते हैं
चलो आज खुद को बर्बाद करते हैं ।

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