कविता

दोस्त

वो दोस्ती एक हसीन किस्सा था

जो वक़्त के साथ गुज़रता गया ,

बचपन की यादों को छोड़

वो सपनो के पीछे उड़ता गया,

लड़ता है आज वो खुद से

जो कभी हमारे लिए लड़ता रहा ।

जिम्मेदारी के बोझ तले

ऐसे  दबा वो और फिर

व्यस्त हुआ दुनियादरी में,

मांज रहा पीतल की तरह

कोई किस्मत को अपने

तो लगा है कोई

खुद की तैयारी में,

पर कुछ यादें  ज़िंदा है

आज भी ऐ दोस्त

इस दिल के हसीन कोने में ,

जब साथ सरारत करते थे

जान मेरी गलतियो को भी

तुम खुद से बगावत करते थे,

ज़िंदगी हसीन लगती थी

उस छन तेरे साथ होने में

सफलता के इस

सुनहले मुकाम पर

ऐ दोस्त

मज़ा न आया तुझे खोने में ।

इसे भी पढ़ें : फरेबी

 

Facebook Comments
Rahul Tiwari
युवा पत्रकार
http://www.thenationfirst.com

Leave a Reply