कविता

की मैं तेरा हूँ

निकाल दो ये ख्याल अपने दिल से

की मैं तेरा हूँ

दूर जा चुका हूँ मैं तुमसे

तू जा ढूंढ ले किसी और को

तू बीते हुए कल की सवेरा थी

और मैं आने वाला कल का सवेरा हूँ ।

आपत्ति मुझे कोई नहीं

यही तो तेरा पेसा है

आज मेरे इश्क़ की गला घोटी हो

कल किसी और के

इश्क़ को दफनाओगी

कलतक हम थे हमसफर तुम्हारे

अब एक नया हमसफर बनाओगी ।

तड़प रहा है कोई इधर तेरे इश्क़ में

उधर, उसकी खुशियों को रौंद

एक नया बिस्तर सजाओगी

आंसुओं की मोल नही तेरी झोली में

उसे भी रक्त के माफिक पी जाओगी ।

और मैं आने वाला कल का सवेरा हूँ ।

तुम मेरे काली रात की अंधेरा थी

और मैं वर्तमान  का सवेरा हूँ

दूर जा चुका हूँ मैं तुमसे

तू जा ढूंढ ले किसी और को

तू बीते हुए कल की सवेरा थी

 

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