कविता जुर्म

कविता: गुड़िया

गुड़िया माँ मेरी आवाज सुन तु , माँ मैं तुझे पुकार रही हूँ | माँ मुझे नहीं पता की मेरे साथ क्या हुआ पर माँ मुझे बहुत ही दर्द हुआ माँ मैं तो जानती भी नहीं जो मेरे साथ हुआ एक ने मुझे बेरहमी से छुआ तो एक ने रस्सी से बांध दिया मैं पुकार […]

कविता

कतरा कतरा खुन का बह जाने दे

कतरा कतरा खुन का बह जाने दे जितना भी दर्द है हमारे अंदर रह जाने दे  समंदर भी आतुर है आगोश  मे भरने को शेष है जिन्दगी अभी हम तैयार हैं हर दर्द सहने को सफलता की सीढी हम खुद बनाएंगे अपने जीवन में चन्दमा सा प्रकाश फैलाएंगे सुर्य की तरह प्रकाश हमारा अपना होगा, […]