कविता

तनहाई

कभी-कभी तनहाई में,
  यादों की परछाई में,
तुम बहुत याद आते हो।
 तुम इतने प्यारे हो कि,
आज भी तुम्हीं भाते हो।
   यह तनहाई ही है,
जो तुम्हारी याद दिलाती है,
 वरना व्यस्त दिनचर्या में,
फुर्सत कहाँ मिल पाती है।
       तुम न सही,
   तुम्हारी याद तो है,
तुम्हारे साथ बिताये हुए,
खूबसूरत अहसास तो है।
मैं इसे ही शब्दों में ढालूँगा,
 अपनी तनहाई को भी,
   यादगार बना लूंगा ।
      मैं तेरे लिए,
     अपने लिए,
इस खूबसूरत जहाँ के लिए,
एक कविता छोड़ जाऊँगा।

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