राजनीति

क्या ये है सुशासन बाबू की साफ-सुथरी छवि ?

वैसे तो बिहार हमेशा से सुर्खियों मे रहने वाला राज्य रहा है चाहे वो नाकारात्मक दृष्टिकोण हो या सकारात्मक लेकिन पिछले कुछ दिनों से बिहार की छवि को धुमिल किया जा रहा है और जो बिहार की बदनामी हुई है इसका कारण  अपराधिक छवि के नेता ही है । कहा जाता है  कि विगत 15 सलों से बिहार को एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जो बिलकुल साफ सुथरी छवि के माने जाते हैं और जब से सुशासन बाबू सत्ता पर काबिज हुए हैं तब से लेकर आज तक बिहार मे भ्रष्टाचार और गूंडागर्दी पर बहुत हद तक लगाम लगी है साथ ही बिहार के विकास की गती भी तीव्र हुई है तो फिर भ्रष्टाचार और गूंडागर्दी कैसे हो रहा है ?

दिनदहारे पत्रकारों की हत्या हो रही है  , घोटालों पे घोटाला हो रहे हैं, बेनामी सम्पत्ति को आर्जित किया जा रहा है इन सभी घटनाओं पर अगर आप नजर डालोगे तो इनमे से एक भी आम आदमी नहीं मिलेगा ।  

अगर सुशासन बाबू साफ सुथरे छवि के हैं तो उनको अपनी कुर्सी बचाने के लिए के लिए ऐसे व्यक्ति के साथ गठबंधन क्यों करना परा जिस पर कोर्ट ने पहले से ही 11 सालों तक चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबंध लगा रखा है । क्या कुर्सी का लालच इतना अधिक हो सकता है कि व्यक्ति किसी के साथ भी गठबंधन कर सकता है और ये बखूबी जानते हुए कि इनके साफ सुथड़ी छवि को धुमील कर सकता है और शायद ऐसा हुआ भी है और ये मैं नहीं बिहार की जनता कह रही है । हालहिं में मैंने एक खबर पोस्ट किया था जिस पर कुछ लोगों के कॉमेंट आए कि कानून सिर्फ बड़े लोगों के लिए होता है अब बिहार को भगवान ही बचा सकते हैं । आखिर क्यों लोगों  का कानून  पर से भरोसा उठता जा रहा है सत्ता ऐसे साफ छवि वाले व्यक्ति के हाथ मे होने के बावजूद भी लोगों का भरोसा अब सिर्फ भगवान पर ही क्यों  रह गया है ?

मेरा मानना है कि सुशासन बाबू को इस विषय मे गम्भीरता से सोंचना चाहिए क्योंकि यह जनता है और जनता कब कौन सा फैसला सुना दे ये कोई नहीं कह सकता और इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश है जहां सत्ता के गलीयारों मे ऐसा तख्तापलट हुआ कि सामने वाला चारो खाने चीत्त हो गया और यह जनता जनार्दन का ही फैसला था ।

 

 

 

 

 

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