राजनीति

बीजेपी के इस लौह पुरुष की नम आँखे कुछ तो कहती है जनाब !

भारतीय राजनीति मे युं तो कई  वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने अपने पार्टी के लिए अहम योगदान दिये हैं लेकिन आज हम एक ऐसे व्यक्तित्व की बात करने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी सारी उम्र पार्टी को दे दी लेकिन पार्टी  हर खास मौके पर उन्हे नकारती रही है । कभी उन्हें प्रधान मंत्री बनाने के नाम पर तो कभी राष्ट्रपत्ति बनाने के नाम पर ।

जी हाँ , मैं बात कर रहा हुं भारतीय जनता पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की ,जिन्होंने अपनी सारी उम्र पार्टी को दे दी और पार्टी उन्हे शायद कुछ भी नही दे पाई । भारतीय जनता पार्टी को अस्तित्व मे लाने में  भी उनका खास योगदान रहा है । लालकृष्ण आडवाणी को कभी पार्टी का कर्णधार के उपाधी से नवाजा गया तो कभी लौह पुरुष की पदवी से सम्मानित किया गया ।

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लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवम्बर 1927 को पाकिस्तान के करांची मे हुआ था इनकी शुरुआती शिक्षा पाकिस्तान के लाहौर मे हुई परंतु बाद मे मुम्बई आकर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ मे स्नातक किया । फिर उनका लगभग सक्रिय राजनीतिक करियर  1951 मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित  जनसंघ  से शुरू हुई उस समय से लेकर 1957 तक आडवाणी पार्टी के सचीव रहे ।

बीजेपी मे लालकृष्ण आडवाणी का योगदान

आडवाणी  1973 से 1977 तक भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे और 1977 से 1979 मे पहली बार केंद्र सरकार मे केबिनेट मंत्री रहे इस दौरान वे सूचना प्रसारण मंत्री थे । फिर 1980 मे भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद इसके महासचिव रहे उसके बाद 1986 से 1991 तक पार्टी के अध्यक्ष रहे इसी बीच 1990 मे आडवाणी ने हिंदूत्व का झंडा बुलंद करने के लिए सोमनाथ से  आयोध्या के लिए  एक रथ यात्रा निकाला लेकिन उन्हें बीच मे ही गिरफ्तार कर लिया गया जिसके बाद इनका राजनीतिक कद और बढ़ गया और 1992 मे बाबरी मस्जिद के विध्वंस के अभीयुक्त के रुप ने इनका नाम भी सामने आया ।

लालकृष्ण आडवानी 3 बार पार्टी आध्यक्ष , 4 बार राज्यसभा और 5 बार लोकसभा के सदस्य रहे । 1999 मे एनडीए की सरकार बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व मे केंद्रीय गृह मंत्री बने और फिर इसी सरकार मे 2002 मे उप प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हुए । 2009 के लोक सभा चुनाव को आडवानी के नेतृत्व मे 116 सीटों पर  बीजेपी की जीत हुई । लालकृष्ण आडवानी वर्तमान समय मे गुजरात के गांधी नगर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के सांसद है ।

महात्मा गांधी के बाद हिंदू जननायक की बात करे तो लालकृष्ण आडवानी दूसरे व्यक्ति थे जिन्होंने  हिंदू आंदोलन की अगुआई की  और पहली बार बीजेपी की सरकार बनवाई  । हिंदूओं मे नई चेतना का सूत्रपात करने वाले और पार्टी को एक मुकाम दिलाने वाले को ही बीजेपी मे बड़े पदों से वंचीत रखी गई ।

पार्टी से किये गये दरकिनार

अब सवाल यह उठता है कि जिस व्यक्ति ने पार्टी को जीवित  रखने के लिए जेल तक का सफर तय किया पार्टी उन्हे छोटे छोटे पदों से ही खुश क्यों  करती रही और कुछ दिनों पहले तक उन्हें राष्ट्रपत्ति के प्रबल दावेदार माना जा रहा था लेकिन इस बार भी लालकृष्ण की झोली खाली ही रह गयी और पार्टी उन्हें दरकिनार करके राष्ट्रपत्ति की उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को घोषित कर दी ।

 

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