राजनीति

तेजस्वी, ये मीडिया पर हमला नहीं, तुम्हारे अंत की शुरूआत है

बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद के आलोचक आप भले हों, लेकिन उन्हे इग्नोर करने का साहस नही कर सकते| लेकिन उनके बेटों को नजरअंदाज करना हीं आजकल आपके बुद्धिमान होने की पहचान है|दोनों तेजू भाई की बात पर आपके ध्यान देने का मतलब है, आपका दिन खराब होना... न तो आपका कोई काम बनेगा और ना हीं आपके अंतर्मन से उसका मनहूस चेहरा बाहर निकलेगा|

लालू जी नें क्या सोंचकर नाम रखा, पता नहीं लेकिन  दोनों के नाम में तेज लगानें से न तो उनकी बुद्धि बढ़ी और न हीं चेहरे का 'तेज'| नाम अच्छा रखनें से आदमी महान होता तो भारत में न जानें कितने मोदी, सचिन, लता जी, अमिताभ जी जैसे सितारे घूम रहे होते| बाप के राजनीतिक पहुँच के कारण मंत्री पद क्या मिला, सरकार को अपने वंशजों की जागीर समझने लगे|

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आज पटना में सीएम नीतिश बाबू नें कैबिनेट की बैठक बुलाई, जिसमें 'छः साल तक आईपीएल की दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के लिए पानी की बोतल' ढ़ोनें वाले तेजस्वी यादव जी भी उपस्थित थे| मूँछ आते आते न जाने कितने क्षेत्र में भाग्य आजमा चुके हैं, लेकिन कामयाबी तब मिले न, जब कोई गुण हो|

जब तेजस्वी माइक पर बोलता है तो फिर समझ में आता है कि 'राहुल गाँधी हीं अच्छा बोलते हैं'| तेजस्वी बाहर आते हीं बोलता है '2004 में मेरी मूँछे भी नही आई थी, स्कैम कैसे करता'| बहुत ढूँढ़नें पर भी कोई ये नही बता रहा कि मूँछे होना हीं घोटाले करने का सूचक है| अब समझ में आया है कि लालू जी के ये सुपुत्र अपनी मूँछे क्यों नहीं रखते|

बहरहाल,  लालू के इस नमूने बेटे को जरूर नीतिश जी नें खरी खोटी सुनाई होगी तभी तो बाहर आते हीं सारा भड़ास मीडिया पर निकाल दिया| इतना तक अगर सही था तो इसके बाद जो हुआ, उसकी कल्पना करना ज्यादा  मुश्किल नहीं था| एक गुंडा जब सरकार में मंत्री हो तो उसके बॉडीगार्ड भी गुंडागर्दी दिखायेंगे हीं| एक रिपोर्टर नें बस इतनी सी गलती कर दी कि उनसे सवाल पूछ दिया|

पहले तो तेजस्वी के सुरक्षागार्ड नें उसके साथ धक्कामुक्की की और जब मन नही भरा तो उस रिपोर्टर और एक विडियो जर्नलिस्ट को जमकर पीटा| ये सारा घटनाक्रम माननीय श्री श्री 1008 तेजस्वी यादव जी महाराज के सामने हो रहा था| लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया नें जब अपनी जिम्मेदारी  निभाई तो लालू के 9वीं  फेल बेटे नें अपने सामने में इसको कुचलने का खूब प्रयास किया|

एक कहावत है 'जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है' लेकिन जिस मनुज की बात हो रही है वो तो पहले से हीं विवेकहीन है| उस विवेकहीन मनुष्य को ऐसा लगता है कि जिस तरह उसके पिता नें अपनी ऊँगली पर पूरे बिहार को नचाया, उसी तरह वह भी नचायेगा तो ये भरी दोपहरी में लोगों के बीच बैठे बैठे सपनें देखने वाली बात हो गई|

भईया तेजस्वी, आपको शायद न पता हो कि जिस समुदाय (मीडिया) से आपनें पंगा लिया है, उसनें आपको परिवार सहित नंगा तो किया हीं है, जो कुछ बाकी रह गया, वो भी सबके सामने होगा| अगर आप इस गुमान में जी रहे हैं कि आप किसी के साथ कुछ भी कर सकते हैं तो तिहाड़ जेल में अपने 'चाचा' शहाबुद्दीन से मिलकर आ जाइये, कुछ अनुभव तो वो जरूर बता देंगे|

आज मीडिया पर तेजस्वी के नेतृत्व में हुए राजद के हमले नें जो संदेश पहुँचाने की कोशिश की है, कि ज्यादा मत बोलो वरना यही हश्र होगा ... तो उन्हे यह जानना चाहिए कि इंदिरा गाँधी के सामने इमरजेंसी काल में जब मीडिया चुप नही रहा तो लालू जी और उनका परिवार किस उर्वर खेत की मूली है|

कभी कभी तो मन में सवाल उठता है कि ऐसे झंडुबाम नमूने हमारे देश की धरती पर हीं क्यों होते हैं| लेकिन फिर अंतर्रात्मा से जवाब के साथ आवाज आती है 'ठीक हीं तो है, कॉमेडियन का होना भी तो जरूरी है, हमेशा कपिल शर्मा हीं थोड़े हँसायेंगे'| तेजस्वी यादव नें आज 'पीपल के पेड़ पर लगे मधुमक्खी के बड़े छत्ते' पर पत्थर मार दिया है जिसका अंजाम वही होगा जो 'मंजूर-ए-खुदा ' होगा| लेकिन कुछ भी हो न हो, तेजू

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