sushma swaraj | सुषमा स्वराज
राजनीति

चेहरे पर वही पुराना 'तेज' लिए दुनिया छोड़ गईं 'सियासत की सुषमा'

दिल्ली की सड़कें, उदासी की एक चादर ओढ़ी हुई है। हमेशा की तरह तेज रफ्तार में सबको पीछे छोड़ती दिल्ली भी आज नहीं दिख रही है। मौसम भी काफी उदास लग रहा है। ना ज्यादा धूप है और ना हीं बारिश की संभावना नजर आ रही है, हाँ कुछ काले बादल जरूर नज़र आ रहे हैं।

दोपहर में तकरीबन दो बजे है। मैं बस द्वारा कैलाश कॉलोनी से पुरानी दिल्ली की ओर बढ़ रहा हूं। पंतनगर के बाद रास्ते के दोनों तरफ दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवान जगह जगह पर नजर आने शुरू हो गए हैं। नजर रोड के दाहिने तरफ जाती है। दरअसल यहाँ दयानंद विद्युत शवदाह गृह है जहाँ भारतीय राजनीति की सबसे सशक्त महिला नेत्री सुषमा स्वराज को अंतिम विदाई दी जानी है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। हो भी क्यों न, देश के प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति सहित गणमान्य लोग आने वाले हैं।

तेजी से सड़कों पर फर्राटा भरती हुई दिल्ली ट्रांजिट की बस, एक्सप्रेस बिल्डिंग स्टॉप पर रूकती है। समय दोपहर के 2.18 हो रहे हैं। अब मुझे एक किलोमीटर का रास्ता तय कर 6, पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित बीजेपी मुख्यालय जाना है। दरअसल सुषमा स्वराज का शव अंतिम दर्शन के लिए बीजेपी मुख्यालय में ही रखा गया है। जैसे जैसे मैं आगे बढ़ रहा हूँ पुलिस के जवानों की संख्या बढ़ती जा रही है। मुझे विश्वास हो रहा है कि मैं सही रास्ते पर हूँ।

दूर से मुझे नजर आने लगी है कि एक जगह बहुत भीड़ है। यानि अब मैं मुख्य द्वार पर पहुँच चुका हूँ। जैसे हीं गेट पर पहुँचा हूँ, रेलमंत्री पीयूष गोयल अंदर जाते दिखे हैं। मैं साइड में रूका हूँ। गेट की तरफ से एक गाड़ी आ रही है, जिसमें बैठे हैं एमडीएच मसाले वाले ताऊ, जो लोगों को नमस्कार कर रहे हैं। बाद में पता चला है कि वह सुषमा जी के पास फफक फफक कर रो पड़े।

फिर भारत में जापान के राजदूत भी जमीन से चिपकी हुई गाड़ी से उतरकर अंदर जा रहे हैं। पहला गेट आमलोगों के लिए रोक दिया गया है। अब मैं दूसरी गेट से अंदर जा रहा हूँ। अंदर आते हीं पतले से रास्ते में दो तीन लाइनें जाती दिख रही है जो आगे जाकर गंगा यमुना सरस्वती की तरह एक दूसरे से लिपट रही है। 'भारत माता की जय' के नारे लग रहे हैं। महलनुमा मुख्यालय के बीचोबीच पार्क में मीडिया वालों की बस्ती बनी है।

अब मैं भारी धक्का-मुक्की के बाद उस जगह पर जा पहुंचा हूँ जहाँ सुषमा स्वराज का पार्थिव शरीर दर्शनार्थ रखा है। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी एक कुर्सी पर खड़े होकर दिशा निर्देश दे रहे हैं। बाकी बहुत सारे मंत्री और सांसद मौजूद हैं। मैंने दिवंगत सुषमा मैम के दर्शन कर लिए। अब राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा सहित कई नेता उनके शव को कंधा देकर वहाँ से बाहर की ओर निकल पड़े हैं। मेरे दायीं तरफ स्मृति ईरानी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, अश्विनी कुमार चौबे जैसे नेता हैं। इस भीड़ में कौन नेता और कौन कार्यकर्ता, सब एक समान दिख रहे हैं। हाँ, कुछ मंत्रियों और नेताओं को उनके बॉडीगार्ड भीड़ से बचाकर निकाल रहे हैं।

लेकिन थोड़ी दूर पर सुषमा स्वराज का पार्थिव शरीर अपनें आख़िरी यात्रा पर निकलने के लिए शव वाहन में रखा जा रहा है। समय हो रहा है दोपहर का 3.15। सफेद फूलों से सजा, सफेद वाहन… चमचमाती हुई साड़ी में तिरंगे से लिपटी हुई भारत के करोड़ों लोगों की चहेती सुषमा दीदी अपने आखिरी सफ़र पर रवाना हो रही हैं। साथ में उनके शरीर के पास बैठी हैं स्मृति ईरानी, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह। ऐसा लग रहा है जैसे मैंने किसी अपने को खो दिया हो। चेहरे पर तेज वही पुराना वाला मानों, अभी उठकर पाकिस्तान की बखिया उधेड़ देंगी, या फिर अरब देशों में फँसे किसी भारतीय के ट्वीट पर उसको वहाँ से निकलवा देंगी। अफ़सोस, यह सिर्फ सोंच हीं सकता हूँ, वास्तविकता से कोसो दूर जा चुकी हैं लाखों के लिए सुषमा 'माँ', करोड़ों के लिए सुषमा 'दीदी'।

शव वाहन के पीछे धीरे धीरे चल रहा हूँ। अब वाहन की गति बढ़ रही है और लोग पीछे पीछे दौड़ रहे हैं। चाहे महिलाएं हों या युवा या कोई अधेड़, हर कोई सुषमा मैम को अपने से अलग नहीं करना चाहता है। लेकिन थोड़ी देर में हमारे जैसे हजारों लोग पीछे छूट जाते हैं । अब सब ऑटो पकड़कर शवदाह गृह की ओर जा रहे हैं और साथ में मैं भी। तकरीबन 20 मिनट के सफर के बाद मैं पहुँच चुका हूँ शवदाह गृह के गेट पर, जहाँ कैमरे और माइक के साथ पत्रकार खड़े हैं। अंदर जाने की इजाजत सिर्फ वीवीआईपी को है और दूरदर्शन तथा एएनआई के पत्रकारों को। बाकी पत्रकार, बाहर किसी नेता के आने पर फुटेज निकाल रहे हैं। मेरे लिए मीडिया गैलरी सबसे सेफ जगह है लेकिन गेट पर किसी आम इंसान को भी खड़े होने की मनाही नहीं है। चारो तरफ कड़ा पहरा है, दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तथा एनएसजी के कमांडो अपने पोजिशन लेकर खड़े हैं।

अंदर से रायफल चलने की आवाज आती है। मतलब इस महान नेत्री को अंतिम विदाई दी जा रही है, 21 तोपों की सलामी। पाँच मिनट भी नहीं हुए कि गेट पर अब दिल्ली पुलिस सतर्कता बढ़ा रही है। वीवीआईपी बाहर निकलने वाले हैं।‌ सबसे पहले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू बाहर निकलते हैं। तकरीबन चार गाड़ियों के काफिले के साथ। उनके ठीक पीछे, पीएम नरेंद्र मोदी काली कलर की उन्नत तकनीक से लैस गाड़ी में हाथ जोड़े बाहर निकल रहे हैं। अब बारी गृहमंत्री अमित शाह के निकलने की है,वह भी हाथ जोड़े चले जाते हैं।

पीछे से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा समेत केंद्र सरकार के कई मंत्री और सांसद तथा कई विदेशी मेहमान भी बाहर निकल रहे हैं। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी सभी गणमान्य लोगों को विदा करके हीं निकल रहे है। पत्रकार भी अपनें माइक और कैमरे समेट रहें हैं। सुषमा स्वराज को अंतिम विदाई दी जा चुकी है…अब सन्नाटा बढ़ रहा है, और यह बढ़ता हीं रहेगा। आखिर हमने एक अनमोल रत्न को खो दिया है।

उनकी पहचान ही थी उनकी आवाज…
संसद से संयुक्त राष्ट्र तक याद रहेंगी सुषमा स्वराज!

सुषमा जी, आप बहुत याद आयेंगी!

नहीं रही सुषमा स्वराज, दिल का दौरा पड़ने से निधन

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Ankush M Thakur
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
http://www.thenationfirst.com

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