जब आपको पता चलेगा कि कश्मीर मुद्दे पर नेहरू सही थे या श्यामा प्रसाद मुखर्जी, तब बहुत तकलीफ होगी
राजनीति

जब आपको पता चलेगा कि कश्मीर मुद्दे पर नेहरू सही थे या श्यामा प्रसाद मुखर्जी, तब बहुत तकलीफ होगी

गुरुवार को राज्यसभा में बहस के दौरान कांग्रेस नेता गुलाम नवी आजाद ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि जब से बीजेपी सत्ता में आई है तब से कश्मीर के हालात और बिगड़े हैं, वहां आये दिन आतंकी हमले हो रहे हैं बॉर्डर पर सीजफायर का उलंघन हो रहा है । गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर विधानसभा भंग करने में बीजेपी की अहम भूमिका रही है । जिसके बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने पलटवार करते हुए कहा कि कश्मीर में अभी जो कुछ भी हो रहा है वो कांग्रेस के गलत नीतियों का नतीजा है जिसे हम सुलझाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं ।

इसके बाद जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगर कोई भी सरकार कश्मीर के मुद्दे को सुलझाना चाहती है तो पहले उसे वहां का इतिहास जानना पड़ेगा जब तक आप वहां के इतिहास से रूबरू नहीं होंगे तब तक समस्याएं जस के तस बनी रहेगी । 1946 से ही कश्मीर में टू नेशन थियोरी सबसे बड़ा मुद्दा है इसे सुलझाने के बजाए बीजेपी वहां तोड़-फोड़ कर सरकार बनाने की कोशिश की थी ।

नवी ने आरोप लगाया कि जब से बीजेपी आई है इन चार सालों में आतंकवाद खूब फला-फुला है । बीजेपी वहां सरकार बनाने में तो सफल रही लेकिन आतंकवाद को रोकने में विफल भी रही । आगे नबी ने कहा है कि हमने लोकल पार्टियों को समर्थन वापस लेते देखा था लेकिन यहां तो केंद्र सरकार ने ही समर्थन वापस ले लिये । इससे साफ पता चलता है कि बीजेपी कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम लगाने में विफल रही है । अब वहां चुनाव जल्द ही होना चाहिए ।

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पंडित नेहरू सही थे या श्यामा प्रसाद मुखर्जी

नवी के इन बातों का जवाब देते हुए अरुण जेटली ने कहा कि आपकी वहां 70 वर्षों तक सरकार रही और इन 70 वर्षों में एक भी वादे पूरे नहीं किये । आप सत्ता पर काबिज तो हो गए लेकिन सत्ता चलाने के इतिहास को ही भूल गए । आपको पता होगा कि 1957 से 67 तक कश्मीर में चुनाव किस हालात में होते थे । वहां जब 1947 में हमला हुआ तब लोगों ने आपकी मदद की आपको उनके योगदान को नहीं भूलना चाहिए ऐसी राजनीति के बाद भी आप कह रहे हैं कि पिछले 4 सालों में अलगाववाद हम ने बढ़ाया है ।

शेख अब्दुल्ला को याद करते हुए जेटली ने कहा कि 1986 में इनसे समझौता के बावजूद भी 1989 तक जो कश्मीर में हुआ था उसी वक़्त अलगाववाद फला-फुला । वहां अलगाववाद और आतंकवाद ही आज मुद्दा है और इन मुद्दों से निपटने के लिए वहां को लोकल पार्टीयों को कुछ बातों पर सहमत होना होगा । जेटली ने कहा कि 'इतिहास जब फैसला करेगा कि कश्मीर के मुद्दे पर पंडित नेहरू सही थे या श्यामा प्रसाद मुखर्जी तब आपको बहुत तकलीफ होगी' ।

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