मनोहर पर्रिकर का निधन | manohar parrikar passed away
राजनीति

मनोहर पर्रिकर साहब, आपका यूँ चले जाना बहुत खल रहा है!

'कभी न रूकता, कभी न थकता, वह भारत माँ का लाल था
दिल्ली में उसकी जरूरत थी, लेकिन गोवा का वह जान था
सफेद रंग जैसी सादगी, वह ईमानदारी की मिसाल था
गर्व से कहो हमनें देखा, पर्रिकर का शासनकाल था'

शाम हँसी खुशी बीत रही थी, सूरज भी अस्त हो चुका था। लेकिन दूसरी तरफ भारतमाता का एक लाडला जिसे शायद उन्होंने हीं अपनी प्रजा की सेवा के लिए भेजा था, अपनी जिंदगी की आखिरी क्षणों की कभी न जीतनें वाली लड़ाई लड़ रहा था।

17 मार्च की रात के तकरीबन सवा आठ बजे थे। अपनें आसपास एक अजीब सी अनहोनी का भय सता रहा था। उसी समय वह ख़बर आई जिसे सुनना कोई भी नहीं चाहता था। हमारे लोकप्रिय जननेता मनोहर पर्रिकर साहब सदा के लिए हम सबको छोड़ के जा चुके थे। ऐसा लगा मानो ह्रदय गति रूक सी गई हो, आँखे छलछला उठी, दिमाग में वे चित्र घूमनें लगे जिसमें पर्रिकर साहब को देखा था। चेहरे पर एक दर्द था, किसी अपनें को खोनें का गम। नियति का हीं खेल है जिसनें 63 साल की उम्र में पर्रिकर के मनोहर व्यक्तित्व को सदा के लिए हमसे जुदा कर दिया। ईश्वर को शायद उनकी ज्यादा जरूरत रही होगी लेकिन इतना तो तय है कि पर्रिकर साहब वहाँ खुश नहीं रहेंगे।

समय की तरह कभी न थकने वाले, धरती जैसे सहज, ईमानदारी की मिसाल गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को पूरा भारत नम आँखों से याद कर रहा है। किसी को विश्वास नहीं हो रहा उन आँखों पर, जिसने मनोहर पर्रिकर जैसे नेता को सामने से या टीवी में देखा है। आखिर वह उस जनता को अनाथ कर कैसे जा सकते हैं,जिनसे वह बेइंतहा मोहब्बत करते थे।

जब 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनी तब नरेन्द्र मोदी नें पर्रिकर साहब से आग्रह किया कि आप रक्षा मंत्री बन जाएं। पर्रिकर नें जवाब दिया कि उनका मन गोवा में हीं लगता है, इसलिए वह दिल्ली नहीं आना चाहते। जबर्दस्ती आग्रह करनें पर रक्षा मंत्रालय को बखूबी संभाला। तीन साल बाद जब 2017 में गोवा विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और भाजपा कई दलों से समर्थन जुटा रही थी। तब उन पार्टियों नें शर्त रखी कि वे इसी शर्त पर समर्थन देंगे कि यहाँ के नेता मनोहर पर्रिकर साहब होंगे।

कुछ समय पहले एक तस्वीर आई जिसमें मनोहर साहब के नाक में पाइप लगी थी, और वह किसी परियोजना का निरीक्षण कर रहे थे। खुद से खड़े नहीं हो पा रहे थे लेकिन रूक नहीं रहे थे। यह जानते हुए कि कैंसर जैसी बीमारी के जिस स्टेज में वह थे, उनका ठीक होना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कभी अपनें जनसेवा के आड़े नहीं आनें दिया। कुछ महीने पहले एक जनसभा में उन्होंने लोगों से कहा 'हाऊ इज द जोश'। लोगों नें तो 'हाई सर' का बहुत जोरदार जवाब दिया। मनोहर पर्रिकर के मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी। फिर भी उनका जोश देखनें लायक था। अपनें मौत को नजदीक पाकर भी न डरनें वाला, न डिगने वाला एक छोटे से राज्य का लोकप्रिय नेता जिसका कायल पूरा देश है, अंतिम समय तक अपनी जनता के लिए काम करता रहा।

पर्रिकर साहब स्कूटी की सवारी बेहद पसंद करते थे। अक्सर प्राइवेट जेट इस्तेमाल करनें की जगह जनरल फ्लाइट लेते थे। ना कोई सुरक्षा गार्ड, और ना हीं बड़े नेता वाले बड़े हावभाव, यही तो वह बात है जो उन्हे खास बनाती है।

एक बार एक ऑडी सवार नें एक स्कूटी वाले को टक्कर मार दी। ऑडी सवार लड़का उतरकर रौब झाड़ते हुए बोला 'जानते नहीं हो मैं डीआईजी का बेटा हूँ'। स्कूटी सवार नें जवाब दिया 'बेटा मैं यहां का सीएम हूँ, गाड़ी धीमे चलाया करो'।

अपनी लोकप्रियता के सवाल पर वह कहते थे कि यही तो वह चीज है जिसे मैनें कमाई है। आज उनके प्रशंसक उनके जाने के गम को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। आज राजनीति जब इतनी गंदी हो चुकी है, मनोहर पर्रिकर जैसा नेता होना मुश्किल हीं नहीं नामुमकिन है। The Nation First की ओर से मनोहर पर्रिकर साहब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

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Ankush M Thakur
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
http://www.thenationfirst.com

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