gordhan zadaphia appointed up incharge for lok sabha elections
राजनीति

कभी नरेंद्र मोदी का धुरविरोधी हुआ करता था यह आदमी, अब बीजेपी ने उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया है

2019 लोकसभा चुनाव का आगाज हो चुका है. सभी पार्टियों ने हर राज्य में अपना-अपना चुनाव प्रभारी नियुक्त करना भी शुरु कर दिया है । इसी क्रम में भाजपा ने भी 18 राज्यों में अपना चुनाव प्रभारी नियुक्त कर लिया है । लेकिन इन 18 नियुक्तियों में एक ऐसे व्यक्ति को बीजेपी ने नियुक्त किया है जिसका नाम जान कर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे । आपको बता दें कि पिछले चुनाव में उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी खुद अमित शाह थे लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने ऐसे व्यक्ति को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है जो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा आलोचक हुआ करता था ।

इस व्यक्ति का नाम है गोवर्धन झड़ापिया । गोवर्धन झड़ापिया एक समय में नरेंद्र मोदी के आलोचकों में शुमार थे । पिछले वर्ष जब गुजरात में भाजपा का चुनाव जीतना मुश्किल हो रहा था ऐसे समय में झड़ापिया ने ही बीजेपी को गुजरात विधानसभा चुनाव जीताने में मदद की थी । पटेल समुदाय के कद्दावर नेताओं में शुमार झड़ापिया ने पर्दे के पीछे रह कर भी वो कारनामा कर दिखया जो शायद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को और अमित शाह मुश्किल लग रहा था । शायद यही वजह है कि अमित शाह ने एक बार फिर झड़ापिया पर विश्वास जताया है और उत्तर प्रदेश का दारोमदार झड़ापिया को सौंपा है ।

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आपको बता दें कि विश्व हिंदू परिषद से संबंध रखने वाले झड़ापिया गुजरात जीताने जैसा कारनामा पहले भी कई बार कर चुके हैं । वर्ष 2002 जब गुजरात दंगों के दौर से गुजर रहा था उस समय गोवर्धन झड़ापिया वहां के मोदी सरकार में गृह मंत्री थे लेकिन इस दंगे के बाद झड़ापिया को नरेंद्र मोदी उनके पद से मुक्त कर दिया और यहीं से झड़ापिया नरेंद्र मोदी के आलोचक बन गये । 2005 में कैबिनेट विस्तार के बाद भी झड़ापिया उस दर्द को भुला नहीं सके और मंत्री पद की शपथ लेने से इनकार कर दिया और उसके 2 साल बाद ही बीजेपी से इस्तीफा दे दिया ।

इस्तीफा देने के बाद गोवर्धन झड़ापिया ने माह गुजरात जनता पार्टी के नाम से अपनी एक पार्टी बनाई और बीजेपी के खिलाफ 2009 चुनाव के लिए कमर कस लिया । उनकी पार्टी को 2009 के चुनाव में 2.3 प्रतिशत वोट मिले लेकिन झड़ापिया खुद की ही सीट बचाने में असफल रहे ।लेकिन अपनी सीट गवाने के बावजूद 3 सीटों पर बीजेपी का सुपरा साफ कर दिया । इसके बाद उन्होंने केशुभाई पटेल से हाथ मिला लिया लेकिन 2012 चुनाव में 167 सीटों में से उनके खाते में महज 2 सीटें ही गई । अब झड़ापिया को लगने लगा कि अपना अस्तित्व बचाने के लिए किसी सहारे की जरूरत है तो उन्होंने सारे विवाद भुला कर एक बार फिर 2014 में बीजेपी का दामन थाम लिया ।

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