योगी सरकार की दरियादिली से यूपी में लौटा गन कल्चर, अब रख सकते हैं तीन हथियार
राजनीति

योगी सरकार की दरियादिली से यूपी में फिर लौटा गन कल्चर

पूरा हिंदुस्तान जानता है, उत्तर प्रदेश में हथियार रखना शौक माना जाता है, रुतबा दिखाने का सबसे सरल और बड़ा माध्यम माना जाता है, 2014 से हथियारों के नए लाइसेंस पर मौजूदा सरकार ने रोक लगाई थी जिसे योगी सरकार ने हटा दिया और हथियार खरीदने का तरीका भी आसान कर दिया है. हथियारों के शौक और शस्त्र रखने का फैशन उत्तर प्रदेश में सदियों पुराना है, इतिहास गवाह है देश के अंदर उत्तर प्रदेश में हमेशा सबसे ज्यादा हथियार पाए जाते हैं,

2014 में उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट ने शस्त्रों के नए लाइसेंसों पर रोक लगा दी थी, अब उसी योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उसी रोक को हटाने का फैसला लिया है. साथ ही शस्त्र चलाने का टेस्ट सिस्टम खत्म कर दिया है यानि की हथियार खरीदने वाले शख्स को फायरिंग कराकर टेस्ट भी नहीं देना होगा. प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने सभी डीएम को निर्देश जारी कर दिए हैं. इसके लिए बाकायदा गाइड लाइंस भी जारी की गई हैं. और साथ हीं शस्त्र लाइसेंस देने के लिए प्राथमिकता भी तय की गई है और कारतूसों की संख्या भी बढ़ा दी गई है.

योगी का ऑपरेशन क्लीन, यूपी में ‘हिस्ट्री’ हो जाएंगे ‘हिस्ट्रीशीटर’!

एक बार में 100 कारतूस रख सकेंगे. लेकिन, अब हर्ष फायरिंग की तो शस्त्र लाइसेंस निरस्त हो जाएगा. आपको बता दें कि शस्त्र नियमावली 2016 के तहत एक लाइसेंस पर तीन हथियार रखे जा सकते हैं. पहले अधिकतम तीन हथियार लेने के लिए तीन लाइसेंस बनवाने पड़ते थे. यूपी में योगी सरकार ने हथियारों के लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक हटा ली है.

यही नहीं अब शस्त्र लाइसेंस लेने के नियम भी बहुत आसान कर दिए गए हैं. हथियार लेने से पहले अब फायरिंग टेस्ट नहीं देना पड़ेगा... साल भर में अब दो सौ कारतूस मिलेंगे लेकिन हथियार ख़रीदने के लिए आधार कार्ड या फिर वोटर पहचान पत्र की कॉपी लगाना होगी सबसे पहले

योगी सरकार की नई गाइडलाइंस समझ लीजिए

उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस से रोक हटी और नए नियमों के तहत हथियार मिलेंगे. हथियार लाइसेंस लेने वालों से फायरिंग कराकर उनका टेस्ट भी नहीं लिया जाएगा. अपराध पीड़ित, विरासतन, व्यापारी-उद्यमी, बैंक-संस्थागत-वित्तीय संस्थाएं, विभिन्न विभागों के प्रवर्तन कार्य में लगे कर्मचारियों के साथ-साथ सैनिक-अर्द्धसैनिक बल-पुलिस बल के कर्मचारी के अलावा सांसद, विधायक और निशानेबाजों को वरीयता देने का प्रावधान किया गया है

नए नियमों में हर्ष फायरिंग करने पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान किया गया है. शस्त्र लाइसेंस धारक एक समय में 100 और एक साल में 200 कारतूस ले सकेंगे लेकिन हथियार ख़रीदने के लिए आधार कार्ड या फिर वोटर पहचान पत्र की कॉपी लगानी होगी.

नई गाइड लाइंस में इनके साथ ही अगर लाइसेंस लेने वाले ने लाइसेंस जारी होने के दो साल के अंदर हथियार नहीं खरीदा तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा. इस केस में अगर धारक असलहा नहीं खरीदने की उचित वजह बताता है, तो इस समय सीमा को एक और साल बढ़ा सकता है.

इस फैसले के बाद एक बार फिर से उत्तर प्रदेश में हथियारों की संख्या बढ़ जाएगी, क्योंकि जिस वक्त नए लाइसेंस पर रोक लगाई गई थी उस समय लोगों में खासा नाराजगी देखी गई थी, इसकी खास वजह यही है उत्तर प्रदेश में हथियार रखना अच्छे रुतबे की निशानी माना जाता है, यही कारण है देश के अंदर सबसे ज्यादा हथियार यूपी में ही मिलते है...

यूपी में रुतबे का प्रतीक है असलहा

साल 2017 में देश के कुल वैध हथियारों में 35 फीसदी से अधिक हथियार अकेले यूपी वालों के पास हैं यहां कुल 12.78 लाख लोगों के पास असलहे हैं जबकि देश भर में यह संख्या 33.69 लाख से अधिक है. यूपी के बाद दूसरे नंबर पर जम्मू-कश्मीर है, जहां 3.69 लाख असलहे हैं.

इसके बाद पंजाब के पास 3.59 लाख वैध लाइसेंस हैं. मध्य प्रदेश के पास 2.47 लाख, हरियाणा के पास 1.41 लाख, राजस्थान के पास 1.33 लाख और कर्नाटक के पास 1.13 लाख हथियारों के लाइसेंस हैं.

यूपी में सबसे अधिक हथियार लखनऊ में और सबसे कम भदोही में 1700 हथियारों के लाइसेंस हैं तो मतलब साफ है यूपी में दोबारा गन कल्चर लौटने वाला है, क्योंकि यूपी वाले हमेशा रुतबा के लिए ही हथियारों का इस्तेमाल करते हैं, और उत्तर प्रदेश में हथियारों के शौकीन भी बड़ी संख्या में देखे जाते हैं, इस फैसले के बाद यूपी का माहौल बिगड़ेगा या सुधरेगा ये वक्त तय करेगा.

678 total views, 1 views today

Facebook Comments

Leave a Reply